सावन का महीना भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना गया है। साल 2026 में सावन आज 16 जुलाई से शुरू हो गया है, जिसका पहला सोमवार 20 जुलाई को पड़ेगा।
देवों के देव महादेव का प्रिय सावन का महीना आज 16 जुलाई से शुरू हो गया है। इस बार सावन में चार सोमवार आएंगे। 11 अगस्त को भगवान शिव का जलाभिषेक कांवड़िए करेंगे। वहीं 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान शिव के पूजन-अर्चना से भोले बाबा की कृपा बरसती है। हालांकि, मैदानी इलाकों में 30 जुलाई से सावन शुरू होगा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शंकर का महीना माना जाता है। शिव का अर्थ कल्याण है। कहा जाता है कि कण-कण में भगवान शिव का वास है। वेदों में उनका साकार और निराकार का वर्णन किया गया है। भगवान शिव क्षण में ही पसीज कर भक्तों को अभय प्रदान करते हैं। सावन का महीना 16 जुलाई से शुरू हो रहा है। सावन में सोमवार को भगवान शिव की पूजा अत्यधिक फलदायी मानी जाती है। सावन शुरू होते ही जगह-जगह बोल बम के नारे गूंजने लगते हैं। इस बार सावन में कुल चार सोमवार का संयोग बन रहा है। इसमें 11 अगस्त को भगवान शिव का जलाभिषेक कांवड़िए करेंगे, 17 अगस्त को नाग पंचमी व 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी, चातुर्मास व्रत का आरम्भ, 27 अगस्त को श्रावण व्रत पूर्णिमा, 28 अगस्त रक्षाबंधन श्रावणी पूर्णिमा होगी, 16 अगस्त तक सौर सावन का महीना होगा. सावन में 9 अगस्त को कामिका एकादशी व्रत व उसी दिन गुरु महाराज का उदय भी होगा। 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या है, उस दिन सूर्य ग्रहण भी है जो भारत में नहीं दिखाई देगा, अतः ग्रहण सूतक का कोई दोष नहीं होगा।
पहाड़ व मैदान में सावन के अंतर का कारण
पर्वतीय क्षेत्र के लोग संक्रांति से संक्रांति तक सावन मनाते हैं, संक्रांति 16 जुलाई से शुरु हो रही है। जबकि मैदानी क्षेत्रों में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक सावन मनाया जाता है। 30 जुलाई को पूर्णिमा है, ऐसे में मैदानी क्षेत्रों में 30 जुलाई से शुरु होगा।