आज अक्षय तृतीया : तिथि, सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त

वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया या आखा तीज कहते हैं। अक्षय का अभिप्राय जिसका कभी क्षय न हो अर्थात् जो सदैव स्थाई रहे और स्थाई वही रह सकता है जो सदैव सत्य है। यद्यपि सत्य बोलने वाले मानव को ‘दुराचारी लोगों’ द्वारा अच्छी दृष्टि से नहीं देखा जाता है क्योंकि इस संसार में विशेष कर इस युग में छल, कपट और प्रपंचियों को लोग महान समझते हैं, उन्हीं से उनका मतलब सिद्ध होता है। जैसे जरासन्ध, शिशुपाल, कंस, रावण आदि लोगों की मित्र मण्डली घनी थी। अतः यह स्वयं सिद्ध है कि सत्य केवल परमात्मा हैं जो सर्वव्यापक हैं,अक्षय और अखण्ड हैं। ईर्ष्या युक्त व्यक्ति कभी समाज का हितैषी नहीं हो सकता। आज की तिथि भगवान परशुराम के अवतरण की तिथि भी है, परशुराम जी सप्त चिरञ्जियों में एक हैं।
अतः आज की तिथि को चिरञ्जीवी तिथि भी कहते हैं। त्रेता युग का आरम्भ आज की तिथि से ही हुआ अतः इसे युगादि तिथि भी कहते हैं, आज कल्पादि तिथि, आज शिवाजी जयन्ती, आज चन्दन यात्रा का दिन।
आज से उत्तराखंड के प्रमुख धामों की यात्रा प्रारम्भ हो जाती है, आज गंगा जमुना दोनों धामों के पट दर्शनार्थियों के लिए अनावृत्त हो रहे हैं। भगवती भागीरथी और यमुना के उद्गम स्थलों में बने मंदिरों के कपाट आज ही खुल रहे हैं। जबकि भोलेनाथ के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे। आज के दिन किए पुण्य कर्म त्याग, दान, धर्म, जप-तप अक्षय होते हैं। आज के दिन ही केवल वर्ष में एक बार वृन्दावन में भगवान श्रीकृष्ण (बिहारी जी) के चरणों के दर्शन भी होते हैं। आज आत्म निरीक्षण का दिन और नाश (क्षय) के कार्यों को अक्षय करने का दिन भी है। आज स्वयं सिद्ध मुहूर्त है, अतः सभी मांगलिक कार्य सम्पन्न किए जाते हैं, आज मन इच्छित फल प्राप्ति हेतु होम/यज्ञ किए जाते हैं, अतः आज अभिजित मुहूर्त में शुभ कर्म किए जाने से लाभकारी वेला है। भगवान बद्रीनाथ के कपाट तेईस अप्रैल को अनावृत होंगे।
यह तिथि वसन्त और ग्रीष्म ऋतु का सन्धि काल भी है। विष्णु धर्म सूत्र, मत्स्यपुराण, नारद पुराण भविष्य आदि पुराणों में इसका विस्तृत वर्णन किया गया है। आज के दिन नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतार हुआ था, भगवान परशुराम विष्णु के अंशावतार हैं और दशावतारों में उनकी गिनती होती है। आज के दिन पुनर्वसु नक्षत्र के प्रदोषकाल में मां रेणुका के गर्भ से चिरञ्जीवी परशुराम का प्रादुर्भाव हुआ, उनका जन्म उच्च के छः ग्रहों में हुआ ऐसे सुयोग में जन्म होना अभूतपूर्व संयोग है। कहा भी गया है कि– कि–
वैशाखस्य सिते पक्षे तृतीयायां पुनर्वसौ। निशाया: प्रथमे यामे रामाख्य: समये हरि: ।।
स्वोच्चगै: षड्ग्रहैर्युक्ते मिथुने राहुसंस्थिते। रेणुकायास्तु यो गर्भादवतीर्णो विभु: स्वयम्।।
आज की तिथि में यदि तृतीया, सोमवार और रोहिणी नक्षत्र हो तो इन तीनों का सुयोग बहुत अच्छा माना जाता है, आज तृतीया तिथि, रविवार व कृतिका नक्षत्र का योग हैं, पर कल प्रातः सोमवार, रोहिणी नक्षत्र व प्रातः साढ़े सात बजे तक तृतीया तिथि है अतः स्नान दान शुभ कर्म सोम वार को किए जाएंगे। परशुराम जमदग्नि ऋषि के पुत्र थे, पुत्र प्राप्ति की कामना से इनकी मांजी रेणुका और विश्वामित्र की माता को प्रसाद मिला पर संयोग से आपस में बदल गया फलस्वरूप परशुराम जी ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय स्वभाव के हुए और विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्म लेने के बाद भी ब्रह्मर्षि बने। जब अहंकार के वशीभूत होकर सहस्रार्जुन ने ऋषि जमदग्नि का वध किया तब क्रुध होकर परशुराम ने अपनी माता द्वारा इक्कीस बार छाती पीटने के कारण इक्कीस बार पृथ्वी को ऐसे दुष्ट क्षत्रिय राजाओं से मुक्त किया। शिव के परशु को धारण करने से इनका नाम परशुराम पड़ा। आज की इस पुण्य तिथि पर सबके कल्याण की कामना करते हुए, ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि समस्त मानव जाति का उद्धार हो और सबका जीवन मंगलमय हो। “
देवभूमि उत्तराखंड में आने वाले सभी अतिथि तीर्थ यात्रियों का हार्दिक अभिनन्दन एवं मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं।
(हर्ष मणि बहुगुण)

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