पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
अगर आप नियमित पूजा करते हैं तो उसकी एक ऐसी ड्रिल बनाइए कि उसमें जो भी काम आप करें- चाहे माला जपें, भगवान को स्नान कराएं, किसी पुस्तक का पारायण करें, कोई भजन गाएं- जो भी करें रुककर करें, टिककर करें। उस समय न अतीत में जाएं, न भविष्य को सोचें। बहुत सारी पूजा ना करें, कोई एक या दो काम करें, पर रुककर करें।
चूंकि आजकल मल्टीटास्किंग का जमाना है, लोग अपने कारोबार की दुनिया में एक साथ बहुत सारे काम करते हैं तो वही आदत पूजा में भी अपनाते हैं। पूजा पूरी तरह रुक कर की जानी चाहिए। मनोवैज्ञानिक तो कहते हैं कि जब भी कोई काम करो, उस पर 20 मिनट का फोकस रखो।
आजकल लोग हर 5-10 मिनट में कुछ न कुछ काम बदलते रहते हैं। मानव मस्तिष्क मूल रूप से एकाग्रता के लिए बना है। चौबीस घंटे में यदि सात बार एकाग्रता साध लें तो आप पाएंगे कि कितना ही काम हो, आप थकेंगे नहीं। कितनी ही विपरीत परिस्थितियां हों, आप अशांत नहीं होंगे। अपना कारोबार, परिवार, समाज, राष्ट्र और निजी जीवन को एक साथ साधना ही मल्टीटास्किंग है।
प्रभात चिंतन
यस्मिन् रुष्टे भयं नास्ति तुष्टे नैव धनागमः।
निग्रहोऽनुग्रहो नास्ति स रुष्टः किं करिष्यति॥
(चाणक्य नीति अध्याय ९/९)
भावार्थ:- जिसके रूठने पर किसी प्रकार का भय नहीं है और न ही ख़ुश होने पर धन मिलने की उम्मीद है, जो दण्ड देने और कृपा करने की क्षमता नहीं रखता, वह व्यक्ति अप्रसन्न होकर क्या कर लेगा?
हे नारायण !
जो मुझे दुख देते हैं, दर्द देते है ,, पीड़ा देते है ,, दरअसल वे मुझपे बड़ी कृपा करतें हैं,,वे वास्तव में तेरा स्मरण मुझे प्रतिपल करायें रहते है ,, उन पर भी दया कर , कृपा कर ।
आज का भगवद् चिन्तन
साधारण नहीं, असाधारण बनें
यदि हमारी शिकायत है, कि दूसरे हमको नहीं समझ पाते हैं, तो चिंता मत करना क्योंकि शब्द जितने गहरे होते हैं, वो उतनी ही देर से और उतने ही कम लोगों की समझ आते हैं। साधारण पुस्तकें तो कोई भी पढ़ कर समझ सकता है, लेकिन कठिन पुस्तकें कुछ असाधारण प्रतिभा संपन्न लोगों की ही समझ आ सकती है। जिसमें गहराई होगी, उसका बड़ा मूल्य भी होगा क्योंकि साधारण समझ तो आता है, लेकिन मूल्यवान नहीं होता।
हमारा व्यक्तित्व जितना असाधारण होगा, उतना ही दूसरों की समझ से परे भी होगा। सरल पुस्तक और साधारण व्यक्तित्व तो सभी पढ़ लेते हैं, लेकिन कठिन पुस्तक एवं असाधारण व्यक्तित्व को चुनिंदा लोगों द्वारा ही पढ़ा जाता है। व्यक्तित्व की गहराई ही हमारे जीवन को साधारण से असाधारण बनाती है। हमारे सारे प्रयास दूसरों को समझ आने के लिए नहीं अपितु स्वयं के जीवन के उद्देश्य को समझने की दिशा में ही होने चाहिए।
बालाजी मंदिर
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:37 ए एम | सूर्यास्त | 07:23 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 08:39 पी एम | चन्द्रास्त | 05:50 ए एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | प्रतिपदा – 04:37 पी एम तक | नक्षत्र | ज्येष्ठा – 07:08 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | मूल | ||
| योग | सिद्ध – 06:19 ए एम तक | करण | कौलव – 04:37 पी एम तक |
| साध्य | तैतिल – पूर्ण रात्रि तक | ||
| वार | सोमवार | ||
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 रौद्र | बृहस्पति संवत्सर | रौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ ( पुरुषोत्तम अधिक) – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 18 | ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | वृश्चिक – 07:08 पी एम तक | नक्षत्र पद | ज्येष्ठा – 05:40 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| धनु | ज्येष्ठा – 12:24 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | वृषभ | ज्येष्ठा – 07:08 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | रोहिणी | मूल – 01:53 ए एम, जून 02 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | रोहिणी – 02:32 पी एम तक | मूल | |
| रोहिणी |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 46 मिनट्स 42 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | ग्रीष्म | रात्रिमान | 10 घण्टे 13 मिनट्स 06 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:30 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:15 ए एम से 04:56 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:35 ए एम से 05:37 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:03 पी एम से 12:58 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:48 पी एम से 03:43 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:22 पी एम से 07:43 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:23 पी एम से 08:25 पी एम |
| अमृत काल | 09:16 ए एम से 11:03 ए एम | निशिता मुहूर्त | 12:10 ए एम, जून 02 से 12:50 ए एम, जून 02 |