आज का पंचांग : भगवान के भरोसे की नींव हो तो कभी डगमगाएंगे नहीं

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

जिसमें नींव न हो, ऐसे भवन को हवा महल कहेंगे। कुछ लोग जीवन भर हवा महल ही बनाते हैं। अगर बचपन की नींव कमजोर हो तो जवानी हवा महल ही होगी। लेकिन ऐसा भी कहते हैं कि भक्त लोग हवा महल बनाते हैं, क्योंकि उनकी नींव भगवान बनाते हैं। इसे भगवान के प्रति भरोसा कहते हैं।

हमारे यहां शास्त्रों में सत्य की गरिमा को स्थापित करने के लिए उसके साथ नारायण को जोड़ दिया है। यानी ईश्वर और सत्य- लगभग एक स्वरूप हैं। कलियुग में लोगों ने इसी फॉर्मूले को उलटा कर दिया। पुराने लोगों ने सत्य की ताकत बढ़ाने के लिए नारायण को जोड़ा तो नए लोगों ने नारायण को असत्य के साथ जोड़ दिया। किंतु यदि आप भक्त हैं तो इस कलियुग में नींव भगवान के भरोसे की रखना, भवन कभी हवा महल नहीं बनेगा।

आज केवल कर्मकांड ही भक्ति नहीं है। किताब पढ़ना, डायरी लिखना, मन को रोकना यानी मेडिटेशन और तन को ठोकना यानी योगासन, यह सब करते हुए भक्तिभाव बनाए रखिए, तो इस कठिन समय में भी हमारा हवा महल ईश्वर के भरोसे की नींव के कारण हवा में डगमगाएगा नहीं।

पञ्चाङ्ग
तिथिप्रतिपदा – 02:10 पी एम तकनक्षत्रअश्विनी – 09:42 ए एम तक
द्वितीयाभरणी
योगप्रीति – 11:56 पी एम तककरणबव – 02:10 पी एम तक
आयुष्मान्बालव – 12:30 ए एम, अप्रैल 19 तक
वारशनिवारकौलव
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते5वैशाख – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमेषनक्षत्र पदअश्विनी – 09:42 ए एम तक
सूर्य राशिमेषभरणी – 03:05 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रअश्विनीभरणी – 08:27 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदअश्विनीभरणी – 01:48 ए एम, अप्रैल 19 तक
  भरणी
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 53 मिनट्स 49 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 05 मिनट्स 11 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:32 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:36 ए एम से 05:20 ए एमप्रातः सन्ध्या04:58 ए एम से 06:05 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:06 पी एम से 12:57 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:32 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:57 पी एम से 07:20 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:59 पी एम से 08:05 पी एम
अमृत काल02:52 ए एम, अप्रैल 19 से 04:18 ए एम, अप्रैल 19निशिता मुहूर्त12:09 ए एम, अप्रैल 19 से 12:53 ए एम, अप्रैल 19

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