आज का पंचांग : भीड़ बाहर की हो या भीतर की, इसे संयमित रखिए

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

भीड़ बढ़ती ही जा रही है। केवल मनुष्यों ही नहीं, बेहिसाब डेटा और सूचनाओं की भी भीड़ बाढ़ की तरह हमारे जीवन में उतर गई है।

भीड़ के कारण आयोजनों के पीछे का सही उद्देश्य कहीं भटक रहा है। कभी-कभी तो लगता है संसार में भीड़ के अलावा कुछ है ही नहीं। संसार को शास्त्रों में सागर कहा गया है। सागर के एक किनारे पर खड़े हो जाओ तो दूसरा किनारा दिखता नहीं है।

एक लहर दिखती है, फिर वो खो जाती है, फिर दूसरी आ जाती है। सागर आकर्षक लगता है, लेकिन उसे पिया नहीं जा सकता। ठीक ऐसा ही भीड़ भरा संसार है। भीड़ की ये मानसिकता धीरे-धीरे हमारे भीतर उतरने लगती है।

उसका एक प्रभाव यह होता है कि हमारे अंदर विचारों की भीड़ पैदा हो जाती है। और विचारों की भीड़ मनुष्य को अशांत करती है, असंतुलित कर देती है। तो भीड़ बाहर की हो या भीतर की, इसे संयमित रखिए, क्योंकि भीड़ के पास भाव नहीं होता- सिर्फ शोर रहता है।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:02 ए एमसूर्यास्त07:00 पी एम
चन्द्रोदय08:58 ए एमचन्द्रास्त11:36 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथिपञ्चमी – 01:19 ए एम, अप्रैल 22 तकनक्षत्रमृगशिरा – 11:58 पी एम तक
षष्ठीआर्द्रा
योगशोभन – 12:31 पी एम तककरणबव – 02:44 पी एम तक
अतिगण्डबालव – 01:19 ए एम, अप्रैल 22 तक
वारमंगलवारकौलव
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते8वैशाख – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिवृषभ – 01:00 पी एम तकनक्षत्र पदमृगशिरा – 07:34 ए एम तक
मिथुनमृगशिरा – 01:00 पी एम तक
सूर्य राशिमेषमृगशिरा – 06:29 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रअश्विनीमृगशिरा – 11:58 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदअश्विनीआर्द्रा – 05:29 ए एम, अप्रैल 22 तक
  आर्द्रा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान12 घण्टे 58 मिनट्स 24 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 00 मिनट्स 38 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:31 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:34 ए एम से 05:18 ए एमप्रातः सन्ध्या04:56 ए एम से 06:02 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:05 पी एम से 12:57 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:33 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:59 पी एम से 07:21 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:00 पी एम से 08:06 पी एम
अमृत काल03:58 पी एम से 05:25 पी एमनिशिता मुहूर्त12:09 ए एम, अप्रैल 22 से 12:53 ए एम, अप्रैल 22
रवि योग11:58 पी एम से 06:01 ए एम, अप्रैल 22 

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