पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का भगवद् चिंतन
सफलता की मिठास
संघर्ष की कड़वाहट ही किसी जीवन में सफलता की मिठास को सुनिश्चित करती है। जिस जीवन में संघर्ष नहीं होगा उस जीवन में सुख-समृद्धि एवं शांति रुपी मधुर फलों की प्राप्ति भी नहीं हो सकती। संघर्ष वो वृक्ष है, जिसकी जडें कड़वी अवश्य होती हैं, लेकिन उसके फल बड़े ही मधुर होते हैं। जिस जीवन में आज जितनी मधुरता है, उस जीवन में कभी उतना ही संघर्ष भी रहा होगा।
प्रायः हम लोग मधुर फल तो चाहते हैं, लेकिन संघर्ष रूपी कड़वाहट का स्वाद नहीं लेना चाहते हैं। हम ये भूल जाते हैं, कि जीवन की मधुरता की जड़ तो संघर्ष ही है। जो इस कड़वाहट से बचने का प्रयास करते हैं, वो जीवन की मधुरता से भी वंचित रह जाते हैं। जिसके जीवन का संघर्ष जितना बड़ा होगा उसके जीवन में उतनी सुख और सफलता की मिठास होगी। पहले संघर्ष की कड़वाहट और फिर सफलता की मिठास, यही तो जीवन का नियम है।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | नवमी – 06:27 पी एम तक | नक्षत्र | अश्लेशा – 08:04 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| दशमी | मघा | ||
| योग | गण्ड – 11:43 पी एम तक | करण | बालव – 06:50 ए एम तक |
| वृद्धि | कौलव – 06:27 पी एम तक | ||
| वार | शनिवार | तैतिल | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 12 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कर्क – 08:04 पी एम तक | नक्षत्र पद | अश्लेशा – 08:05 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सिंह | अश्लेशा – 02:04 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मेष | अश्लेशा – 08:04 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | अश्विनी | मघा – 02:07 ए एम, अप्रैल 26 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | अश्विनी | मघा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 04 मिनट्स 22 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 54 मिनट्स 43 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:30 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:31 ए एम से 05:14 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:52 ए एम से 05:58 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:04 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:33 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:01 पी एम से 07:23 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:02 पी एम से 08:08 पी एम |
| अमृत काल | 06:29 पी एम से 08:04 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:08 ए एम, अप्रैल 26 से 12:52 ए एम, अप्रैल 26 |
| रवि योग | पूरे दिन |