पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का भगवद् चिंतन
आचरण में भी उतारें
उपदेश करना जितना आसान है, उन्हें आचरण में धारण करना उतना ही कठिन है। वाणी के बजाय कार्य से दिए गए उदाहरण कई अधिक प्रभावी होते हैं। कोरा उपदेश भी तब तक कोई काम नहीं आता जब तक उसे चरितार्थ न किया जाये।
प्रत्येक सफल व्यक्तियों में एक बात की समानता मिलती है और वो ये कि उन्होंने केवल वाणी से नहीं अपितु अपने कार्यों से भी उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। उन्होंने जो कहा वही किया। बिना पुरुषार्थ के हमारे महान से महान संकल्प भी केवल रेत के विशाल महल का निर्माण करने जैसे हो जाते हैं।
हमारे पास संकल्प रूपी मजबूत आधारशिला तो होनी ही चाहिए पर साथ में पुरुषार्थ रूपी पिलर भी होने चाहिए, जिस पर सफलता रुपी गगनचुम्बी महल का निर्माण संभव हो सके। संकल्प और पुरुषार्थ ही किसी व्यक्ति के जीवन में सफलता का आधार है। श्रेष्ठ उपदेशों को आचरण में उतारना ही जीवन को श्रेष्ठ बनाने की अनिवार्यता भी है।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:56 ए एम | सूर्यास्त | 07:04 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 03:20 पी एम | चन्द्रास्त | 03:43 ए एम, अप्रैल 28 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | एकादशी – 06:15 पी एम तक | नक्षत्र | पूर्वाफाल्गुनी – 09:18 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| द्वादशी | उत्तराफाल्गुनी | ||
| योग | ध्रुव – 09:36 पी एम तक | करण | वणिज – 06:07 ए एम तक |
| व्याघात | विष्टि – 06:15 पी एम तक | ||
| वार | सोमवार | बव | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 14 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | सिंह – 03:35 ए एम, अप्रैल 28 तक | नक्षत्र पद | पूर्वाफाल्गुनी – 08:49 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| कन्या | पूर्वाफाल्गुनी – 03:03 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मेष | पूर्वाफाल्गुनी – 09:18 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | अश्विनी – 01:24 ए एम, अप्रैल 28 तक | उत्तराफाल्गुनी – 03:35 ए एम, अप्रैल 28 तक | |
| भरणी | उत्तराफाल्गुनी | ||
| सूर्य नक्षत्र पद | अश्विनी – 01:24 ए एम, अप्रैल 28 तक | ||
| भरणी |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 07 मिनट्स 17 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 51 मिनट्स 49 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:30 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:29 ए एम से 05:13 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:51 ए एम से 05:56 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:04 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:34 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:02 पी एम से 07:24 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:04 पी एम से 08:09 पी एम |
| अमृत काल | 02:41 पी एम से 04:20 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:08 ए एम, अप्रैल 28 से 12:51 ए एम, अप्रैल 28 |