मोहिनी एकादशी व्रत आज : कथा के पाठ से मिलती है पापों से मुक्ति और पुण्य फल

मोहिनी एकादशी का व्रत आज सोमवार 27 अप्रैल को रखा जाएगा। मोहिनी रूप रखकर ही विष्णु जी ने देवताओं को अमृतपान कराया था।इसलिए यह एकादशी भगवान श्रीहरि के विष्णु रूप को समर्पित है। इस दिन व्रत का संकल्प करके भगवान विष्णु की पूजा कर इस कथा को पढ़ा जाता है। इस व्रत को करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यहां पढ़ें इस व्रत से जुड़ी कथा, जिसका पाठ करना चाहिए और शाम को कीर्तन करना चाहिए।

Uttarakhand

युधिष्ठिर जी के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि परम बुद्धिमान श्रीरामचंद्र जी ने महर्षि वशिष्ठ से यही बात पूछी थी, जिसे आज तुम मुझसे पूछ रहे हो। भगवान श्री राम जी को वशिष्ठ जी ने बताया कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी होती है, उसका नाम मोहिनी है। वह सब पापों को हरने वाली और उत्तम है। उसके व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल तथा पातक- समूह से छुटकारा पा जाते हैं।

सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नामकी सुंदर नगरी है। वहां चन्द्र वंश में उत्पन्न हुए द्युतिमान नामक राजा राज करते थे। उसी नगर में धनपाल नामक धनधान्य से परिपूर्ण और समृद्धिशाली एक वैश्य रहता था। वह सदा पुण्यकर्म में ही लगा रहता था। दूसरों के लिए कुआं, मठ, बगीचा, पोखरा और घर बनवाया करता था। वह सदा भगवान श्री विष्णु की भक्ति में लगा रहता था। उसके पांच पुत्र सुमना, द्युतिमान, मेधावी, सुकृत तथा धृष्ट बुद्धि थे। धृष्ट बुद्धि वैश्य का पांचवां पूत्र था। वह सदा बड़े-बड़े पापों में ही लिप्‍त रहता था। वह वेश्याओं से मिलने के लिए लालायित रहता था। न तो वह देवताओं का पूजन करता था और न ही पितरों और ब्राह्मणों का सत्कार करता था।

एक दिन वह वेश्या के साथ उसे घूमता हुआ देखकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया। परिवार के अन्य लोगों ने बी उसका परित्याग कर दिया। अब उसके जीवन में कष्ट-पर-कष्ट आने लगे और वह इधर-उधर भटकने लगा। एक दिन वह भटकता-भटकता महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पर जा पहुंचा। तब वैशाख का महीना चल रहा था। कौण्डिन्य गंगाजी में स्‍नान करके आ रहे थे तभी धृष्ट बुद्धि उनके पास गया और हाथ जोड़ बोला-‘ब्राह्मण श्रेष्ठ! मुझपर दया करके कोई ऐसा व्रत बताइए, जिसके पुण्य के प्रभाव से मेरी मुक्ति हो जाए।’ कौण्डिन्य जी बोले कि वैशाख के शुक्ल पक्ष में मोहिनी नाम से प्रसिद्ध एकादशी का व्रत करो। मोहिनी एकादशी के दिन उपवास करने पर प्राणियों के अनेक जन्मों के किए हुए महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।

Uttarakhand Uttarakhand

मुनि का यह वचन सुनकर धृष्ट बुद्धि का चित प्रसन्न हो गया। उसने कौण्डिन्‍य जी के उपदेश से विधिपूर्वक मोहिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के करने से वह निष्पाप हो गया और दिव्य देह धारण कर गरुड़ पर आरूढ़ हो सब प्रकार के उपद्रवों से रहित श्रीविष्णुधाम को चला गया। इस प्रकार यह मोहिनी एकादशी का व्रत बहुत उत्तम है। इसके पढ़ने और सुनने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है।

Uttarakhand UttarakhandUttarakhand