पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आजकल तो कहीं भी जाना हो तो रास्ते की जानकारी मशीन से मिल जाती है। लेकिन परमात्मा के मार्ग की जानकारी कोई मशीन नहीं दे पाएगी। जब हम भगवान की ओर चलते हैं तो रास्ते खंड-खंड हो सकते हैं। अलग-अलग भी रहेंगे। इन अलग-अलग रास्तों से हम आत्मा तक पहुंच जाएंगे।
आत्मा का अगला कदम परमात्मा है। लेकिन आत्मा से परमात्मा तक जाने के लिए फिर कोई मार्ग नहीं लगता। वहां छलांग ही लगानी पड़ती है। रुक-रुक कर चलें मार्ग पर, क्योंकि यह मार्ग की आवश्यकता है। रास्ते कई तरह के होते हैं, लेकिन मंजिल एक ही है।
अब आजकल तकनीक से लोगों ने ऑफिस को जेब में रख लिया है। लेकिन परमात्मा को जेब में रखने की भूल न करें।जिन्हें भी परमात्मा की ओर चलना हो, वो कोई भी मार्ग चुन लें। साधन भी अलग-अलग अपना सकते हैं और आत्मा तक पहुंच जाएंगे। लेकिन आत्मा के बाद फिर मार्ग चुनने की कोशिश न करें। सीधे छलांग लगाइए, आप अपने को परमात्मा के पास पाएंगे।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:55 ए एम | सूर्यास्त | 07:05 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 05:11 पी एम | चन्द्रास्त | 04: एम, अप्रैल 30 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | त्रयोदशी – 07:51 पी एम तक | नक्षत्र | हस्त – 12:16 ए एम, अप्रैल 30 तक |
|---|---|---|---|
| चतुर्दशी | चित्रा | ||
| योग | हर्षण – 08:52 पी एम तक | करण | कौलव – 07:18 ए एम तक |
| वज्र | तैतिल – 07:51 पी एम तक | ||
| वार | बुधवार | गर | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 16 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कन्या | नक्षत्र पद | हस्त – 11:23 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मेष | हस्त – 05:49 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | भरणी | हस्त – 12:16 ए एम, अप्रैल 30 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | भरणी | चित्रा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 10 मिनट्स 10 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 48 मिनट्स 59 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:30 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:28 ए एम से 05:11 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:50 ए एम से 05:55 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | कोई नहीं | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:34 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:04 पी एम से 07:25 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:05 पी एम से 08:10 पी एम |
| अमृत काल | 05:51 पी एम से 07:34 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:08 ए एम, अप्रैल 30 से 12:51 ए एम, अप्रैल 30 |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 05:55 ए एम से 12:16 ए एम, अप्रैल 30 | रवि योग | 12:16 ए एम, अप्रैल 30 से 05:54 ए एम, अप्रैल 30 |