पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का भगवद् चिंतन
आत्मिक उन्नति
सदैव सत्संग के आश्रय में रह कर ही आत्मिक उन्नति संभव हो सकती है। यदि बुद्धि को परिमार्जित करते हुए उसमें प्रतिदिन कुछ श्रेष्ठ विचार, कुछ सद्विचार न भरे जाएं तो हमारे वही कलुषित विचार जीवन के लिए जहर बनकर उसकी आत्मिक उन्नति में बाधक बन जाते हैं। भोर की प्रथम किरणों के साथ कुछ पुराने फूल झड़ जाते हैं और नयें फूल खिल उठते हैं व प्रकृति को सुवासित करते हैं।
इसी प्रकार एक नया दिन एक नईं ऊर्जा और एक नयें विचारों के साथ आता है। एक नया दिन आता है तो साथ में नवीन उल्लास और नईं आश लेकर भी आता है ताकि हम अपने जीवन को नयें विचारों से सुवासित एवं उल्लासित कर सकें। मानव मन को भी प्रतिदिन सद्विचार और सत्संग रूपी साबुन से स्वच्छ करने की आवश्यकता होती है ताकि विचारों की कलुषिता का मार्जन हो सके। सदा सत्संग के आश्रय में रहो ताकि हृदय की निर्मलता और विचारों की पवित्रता बनी रहे।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:48 ए एम | सूर्यास्त | 07:09 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 12:15 ए एम, मई 08 | चन्द्रास्त | 09:40 ए एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | पञ्चमी – 10:13 ए एम तक | नक्षत्र | पूर्वाषाढा – 06:46 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| षष्ठी | उत्तराषाढा | ||
| योग | साध्य – 02:00 ए एम, मई 08 तक | करण | तैतिल – 10:13 ए एम तक |
| शुभ | गर – 11:20 पी एम तक | ||
| वार | गुरुवार | वणिज | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | रौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 24 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | धनु – 01:26 ए एम, मई 08 तक | नक्षत्र पद | पूर्वाषाढा – 12:04 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| मकर | पूर्वाषाढा – 06:46 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मेष | उत्तराषाढा – 01:26 ए एम, मई 08 तक | |
| सूर्य नक्षत्र | भरणी | उत्तराषाढा | |
| सूर्य नक्षत्र पद | भरणी |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 21 मिनट्स 04 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 38 मिनट्स 12 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:29 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:23 ए एम से 05:06 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:44 ए एम से 05:48 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:02 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:42 पी एम से 03:36 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:08 पी एम से 07:29 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:09 पी एम से 08:13 पी एम |
| अमृत काल | 01:23 पी एम से 03:11 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:07 ए एम, मई 08 से 12:50 ए एम, मई 08 |
| रवि योग | 06:46 पी एम से 05:48 ए एम, मई 08 |