आज का पंचांग : विश्वासपूर्ण जीवन

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का भगवद् चिन्तन
विश्वासपूर्ण जीवन

विश्वास का बल ही प्रतिकूलताओं में जीने का साहस प्रदान करता है। जहाँ विश्वास होता है, वहीं धैर्य भी जन्म ले पाता है और जहाँ धैर्य का जन्म होता है, वहाँ नैराश्य का विलय एवं पुरुषार्थ का उदय भी हो जाता है। सब कुछ खो जाने पर भी यदि हमने जीवन में अपने विश्वास को नहीं खोया है तो आज नहीं तो कल, विश्वास के बल पर उन सब को दुबारा से प्राप्त कर ही लिया जायेगा। विश्वास स्वयं पर होना चाहिए, विश्वास अपने कर्मों पर होना चाहिए और विश्वास परमात्मा पर होना चाहिए।

विश्वास के अभाव में ये प्रकृति किसी को कुछ भी नहीं दे सकती है। वृक्ष की प्राप्ति के लिए हमें बीज पर विश्वास होना ही चाहिए और फल की प्राप्ति के लिए हमें वृक्ष पर भी विश्वास होना चाहिए। विश्वास में अद्भुत सामर्थ्य है। विश्वास के बल से ही पाण्डवों ने बाहुबल और संख्याबल में बहुत कम होने के बावजूद भी महाभारत जैसे युद्ध को जीतकर अपने खोये हुए स्वाभिमान को पुनः प्राप्त किया। जीवन में अविश्वास ही उसकी अशांति का कारण भी है।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:49 ए एमसूर्यास्त07:09 पी एम
चन्द्रोदय11:32 पी एमचन्द्रास्त08:45 ए एम
पञ्चाङ्ग
तिथिचतुर्थी – 07:51 ए एम तकनक्षत्रमूल – 03:54 पी एम तक
पञ्चमीपूर्वाषाढा
योगसिद्ध – 01:12 ए एम, मई 07 तककरणबालव – 07:51 ए एम तक
साध्यकौलव – 09:03 पी एम तक
वारबुधवारतैतिल
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते23वैशाख – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिधनुनक्षत्र पदमूल – 09:09 ए एम तक
सूर्य राशिमेषमूल – 03:54 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रभरणीपूर्वाषाढा – 10:38 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदभरणीपूर्वाषाढा – 05:21 ए एम, मई 07 तक
  पूर्वाषाढा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 19 मिनट्स 46 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान10 घण्टे 39 मिनट्स 30 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:29 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:24 ए एम से 05:06 ए एमप्रातः सन्ध्या04:45 ए एम से 05:49 ए एम
अभिजित मुहूर्तकोई नहींविजय मुहूर्त02:42 पी एम से 03:36 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:08 पी एम से 07:29 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:09 पी एम से 08:13 पी एम
अमृत काल08:42 ए एम से 10:30 ए एमनिशिता मुहूर्त12:07 ए एम, मई 07 से 12:50 ए एम, मई 07

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