आज का पंचांग : उचित चाह रखिये

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

प्रभात चिंतन

सुशीलो भव धर्मात्मा मैत्र: प्राणिहिते रत:।
निम्नं यथाप: प्रवणा: पात्रमायान्ति सम्पद:।।

भावार्थ:- हे मनुष्य ! तू सुशील, पुण्यात्मा, प्रेमी और समस्त प्राणियों का हितैषी बनो ! जैसे नीचे भूमि की ओर लुढ़कता हुआ जल अपने आप ही पात्र में आ जाता है, वैसे ही सत्पात्र और विनम्र मनुष्य के पास सम्पत्तियां स्वयं आ जाती हैं।

आज का भगवद् चिन्तन

उचित चाह रखिये

जीवन का एक साधारण सा नियम है, कि जिसके पास जो होता है, वो वही दूसरों को भी बाँटता है। जिसके पास सुख होता है, वो दूसरों को सुख बाँटता है और जिसके पास दुःख होता है, वो दूसरों को भी दुःख बाँटता है। जिसके पास ज्ञान होता है, वो ज्ञान बाँटता है, जिसके पास हास्य होता है, वो हास्य बाँटता है और जिसके पास क्रोध होता है, वो क्रोध बाँटता है।

दुःखी व्यक्ति से सुख एवं प्रसन्नता की और क्रोधी व्यक्ति से उदारता एवं प्रेम की चाह रखना मरुस्थल में शीतल झरने एवं सुंदर उपवन की चाह रखने जैसा ही है। चाह रखना गलत भी नहीं लेकिन चाह किससे रखनी चाहिए ये जान लेना भी आवश्यक है। सबसे एक जैसी चाह रखना ही व्यर्थ है क्योंकि जिसका जीवन आशीर्वादों से भरा हो वही आपकी झोली को भी आशीर्वाद से भर सकता है।

श्री सालासर बालाजी मंदिर

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:36 ए एमसूर्यास्त07:30 पी एम
चन्द्रोदय06:34 ए एमचन्द्रास्त09:03 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथिद्वितीया – 12:52 ए एम, जून 17 तकनक्षत्रआर्द्रा – 04:12 पी एम तक
तृतीयापुनर्वसु
योगवृद्धि – 12:35 ए एम, जून 17 तककरणबालव – 02:39 पी एम तक
ध्रुवकौलव – 12:52 ए एम, जून 17 तक
वारमंगलवारतैतिल
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 रौद्रबृहस्पति संवत्सररौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते2ज्येष्ठ – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमिथुननक्षत्र पदआर्द्रा – 05:38 ए एम तक
सूर्य राशिमिथुनआर्द्रा – 10:55 ए एम तक
सूर्य नक्षत्रमृगशिराआर्द्रा – 04:12 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदमृगशिरापुनर्वसु – 09:31 पी एम तक
  पुनर्वसु – 02:51 ए एम, जून 17 तक
  पुनर्वसु
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 53 मिनट्स 20 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 06 मिनट्स 46 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:33 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:15 ए एम से 04:56 ए एमप्रातः सन्ध्या04:36 ए एम से 05:36 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:05 पी एम से 01:01 पी एमविजय मुहूर्त02:52 पी एम से 03:47 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:28 पी एम से 07:49 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:30 पी एम से 08:30 पी एम
अमृत काल07:25 ए एम से 08:50 ए एमनिशिता मुहूर्त12:13 ए एम, जून 17 से 12:53 ए एम, जून 17
त्रिपुष्कर योग04:12 पी एम से 12:52 ए एम, जून 17