अहोई अष्टमी व्रत आज : जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

  • मां अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए रखती है अहोई अष्टमी का व्रत।
  • जानें अहोई अष्टमी व्रत की पूजा विधि और इसका महत्व।

पंडित हर्षमणि बहुगुणा

अहोई अष्टमी का व्रत आज 28 अक्टूबर को किया जाएगा। इस दिन माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर नहाकर व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद पूरे दिन व्रत रखकर शाम को सूर्यास्त के बाद माता की पूजा करती हैं और इसके बाद व्रत पूरा करती हैं।

 महत्व

इस दिन माताएं अपने बच्चों के लिए अहोई माता का व्रत रखती हैं। उनकी पूजा करती हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए प्रार्थना करती हैं। तारों की पूजा के साथ ये व्रत पूरा किया जाता है। बच्चों की कामना रखने वाले लोगों के लिए ये व्रत बहुत खास माना जाता है। इस व्रत से महिलाओं को सौभाग्य और समृद्धि का भी आशीर्वाद मिलता है।

अहोई अष्टमी व्रत पूजा विधि
अहोई अष्टमी का व्रत करने वाली महिलाएं सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सफाई करके और स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद दीवार पर गेरू और चावल से अहोई माता और स्याहु व उसके सात पुत्रों का चित्र बनाएं। या फिर आप चाहें तो बाजार से भी पोस्टर इस्तेमाल कर सकते हैं। अब एक मटके में पानी भरकर और उस पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं और मटके को फिर ढक दें।

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व
माना जाता है कि अहोई अष्टमी का व्रत काफी शुभदायी और फलदायी माना जाता है। इस व्रत को पूरे विधि विधान से करने पर माता अहोई की विशेष कृपा प्राप्त होती है और संतान की सुखदायी और लंबी उम्र की कामना पूरी होती है। अष्टमी तिथि को माताएं चांदी की माला भी पहनती हैं, जिसमें हर साल दो चांदी के मोती जोड़ती हैं। इस व्रत में कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। जैसे चाकू, कैंची आदि नुकीली चीजों से इस दिन दूरी बनाकर रखनी होती है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्ति अगर अहोई अष्टमी का व्रत करते हैं तो उनकी भी इच्छा पूरी होती है।