पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
शरद पूर्णिमा न केवल धार्मिक रूप से, बल्कि आयुर्वेद की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और पृथ्वी के सबसे निकट आता है। चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं, जो इस दिन रात्रि के समय विशेष रूप से सक्रिय होते हैं।
इस रात के बारे में कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात वृंदावन में गोपियों के साथ दिव्य रास लीला की थी। अतः ये दिन भक्ति, प्रेम और अध्यात्म का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा के लिए समर्पित है, लेकिन इस विशेष तिथि पर भगवान शिव की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
जानिए इस दिन कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं…
खीर बनाकर चांदनी में रखना
शरद पूर्णिमा की रात खीर (दूध और चावल से बनी खीर) को चांद की चांदनी में रखने की परंपरा है। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणें जब खीर पर पड़ती हैं, तो वह औषधीय गुणों से भर जाती है। इस खीर का सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।
लक्ष्मी पूजन
शरद पूर्णिमा की रात विशेष रूप से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। दीप जलाकर घर के हर कोने को रोशन किया जाता है, ताकि मां लक्ष्मी का स्वागत किया जा सके।
शुद्धता का पालन करें
शरद पूर्णिमा का व्रत रखने से मन और शरीर दोनों की शुद्धि होती है। इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और मानसिक रूप से शांत रहना चाहिए। विचारों को सकारात्मक और शुद्ध बनाए रखें।
आश्विन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन |आज है सत्य व्रत, सत्य व्रत, पूर्णिमा व्रत और शरद पूर्णिमा|
आज चतुर्दशी तिथि 12:24 PM तक उपरांत पूर्णिमा | नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 04:01 AM तक उपरांत रेवती | वृद्धि योग 01:13 PM तक, उसके बाद ध्रुव योग | करण वणिज 12:24 PM तक, बाद विष्टि 10:53 PM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 07:51 AM – 09:19 AM है | आज चन्द्रमा मीन राशि पर संचार करेगा
शरद पूर्णिमा से जुड़ी अन्य बातें
शरद पूर्णिमा की रात भजन-कीर्तन, मंत्र जप और ध्यान करते हुए जागरण करें। ऐसा करने से मानसिक शांति मिलती है।
इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
शरद पूर्णिमा पर क्रोध, ईर्ष्या और झूठ जैसे नकारात्मक भावों से बचना चाहिए। इन भावों से हमारे पुण्य का क्षय होता है। मांसाहार, शराब आदि का भी सेवन न करें।
ध्यान रखें जब खीर चांदनी में रखी जाए तो उसे किसी जालीदार ढक्कन से ढंक देना चाहिए, ताकि उसमें गंदगी या कीट न जाएं।
आयुर्वेद के अनुसार, शरद ऋतु में शरीर का ताप बढ़ जाता है। इस समय चंद्रमा की शीतल किरणें शरीर की गर्मी को संतुलित करती हैं। इसलिए इस रात को खुले आसमान के नीचे समय बिताना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। विशेषकर चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को खाने से पित्त संबंधित विकारों में राहत मिलती है।
आज का विचार
सारस की तरह एक बुद्धिमान व्यक्ति को अपने इन्द्रियों पर नियन्त्रण रखना चाहिए और अपने उद्देश्य को स्थान की जानकारी और समय की योग्यता के अनुसार प्राप्त करना चाहिए.!
आज का भगवद् चिंतन
महारास एक चिंतन
महारास अर्थात एक ऐसा महोत्सव जिसमें स्वयं ब्रह्म द्वारा जीव को अपने ब्रह्म रस में डुबकी लगाने का परम सौभाग्यशाली अवसर प्रदान किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं पूर्ण ब्रह्म हैं तो असंख्य गोपियाँ वो साधक हैं जिन्होंने अपने सर्वस्व का त्याग कर केवल उन पूर्ण ब्रह्म का वरण किया है।
शास्त्रों में कहा गया है कि “रसो वै स:” अर्थात परमात्मा रस स्वरूप हैं अथवा जो चराचर जगत में रस तत्व है, वही परमात्मा है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उसी आनंद रूप रस का असंख्य गोपिकाओं के मध्य वितरण ही तो रास है। जीवन के अन्य सभी सांसारिक रसों का त्याग कर जीव द्वारा ब्रह्म के साथ ब्रह्मानन्द के आस्वादन का सौभाग्य ही महारास है।
काम तभी तक जीव को सताता है जब तक जीव जगत में रहे। जगदीश की शरण लेते ही उसका कामभाव स्वतः तिरोहित हो जाता है। श्रीमद् भागवत जी ने कहा कि जीव का जो साधन, काम को मिटाकर राम से मिला दे, वही महारास है।
शरद पूर्णिमा महारास महामहोत्सव आप सभी के लिए शुभ एवं मंगलमय हो।