पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
आश्विन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन |आज है कार्तिक स्नान, वाल्मीकि जयंती, पूर्णिमा|
आज पूर्णिमा तिथि 09:17 AM तक उपरांत प्रतिपदा तिथि 05:53 AM तक उपरांत द्वितीया | नक्षत्र रेवती 01:28 AM तक उपरांत अश्विनी | ध्रुव योग 09:31 AM तक, उसके बाद व्याघात योग 05:35 AM तक, उसके बाद हर्षण योग | करण बव 09:17 AM तक, बाद बालव 07:37 PM तक, बाद कौलव 05:53 AM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 03:09 PM – 04:37 PM है | आज 01:28 AM तक चन्द्रमा मीन उपरांत मेष राशि पर संचार करेगा |
बुद्धि होने से नहीं, बुद्धि को मांजने से बुद्धिमान होते हैं
हम अपने बच्चों का नाम बहुत सोच-संभलकर रखते हैं। पहले सीधे-सादे नाम हुआ करते थे। अब जिसका भी नाम पूछो, उसका अर्थ भी जानना पड़ता है। लेकिन अपने बच्चों की परवरिश में पैसा, समय और परिवार की कीमत जरूर समझाइएगा।
उनके नाम को त्याग और उत्साह से जोड़िए। ये प्रदर्शन का युग है। लोग अपने संकल्पों का भी प्रदर्शन करने लगते हैं और यहीं से दबाव में आ जाते हैं। हमें अपने बच्चों को सिखाना चाहिए कि संकल्प तो लें पर बिना शोर-शराबे के उसे पूरा करें। और जब वो ऐसा कर रहे होंगे तो सुख और दुःख जीवन में आएंगे।
इसकी तैयारी बहुत कम माता-पिता अपने बच्चों को कराते हैं। क्योंकि सुख भी दुःखों का मध्यांतर है। हम अपने बच्चों से कहें कि स्वाभिमान उतना ही रखें कि गरिमा बनी रहे। बुद्धि होने से कोई बुद्धिमान नहीं हो जाता।
बुद्धि को मांजने से होता है। और बुद्धि को मांजने के लिए सांसारिक और आध्यात्मिक तरीके संयुक्त रूप से आजमाए जाएं। यह बात बच्चों को समझाने का समय आ गया है।
आज का भगवद् चिन्तन
शरद पूर्णिमा तत्व विचार
शरद पूर्णिमा की रात्रि में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा असंख्य गोपिकाओं के मध्य माँ यमुना के पावन तट पर महारास रचाया गया। प्रथमतः उन ब्रह्म द्वारा बाँसुरी का नाद किया जाता है अर्थात् जीव को अपनी ओर आकृष्ट करने हेतु आवाज लगाई जाती है। कुछ जीव इस आवाज को सुन नहीं पाते हैं, कुछ सुन तो लेते हैं, लेकिन उसके संदेश को समझ नहीं पाते हैं।
जिनके द्वारा उन परम ब्रह्म के इस इशारे को समझ लिया जाता है, वो सब भोग विलास का त्याग करके उनकी ही शरण में चले जाते हैं। जब जीव द्वारा पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ श्रीकृष्ण की शरण ग्रहण की जाती है, तब श्रीकृष्ण द्वारा अपना वह ब्रह्म रस उन शरणागतों के मध्य मुक्त हस्तों से वितरित करके उनको अलौकिक ब्रह्म रस का आस्वादन कराके निहाल किया जाता है।
किसी भी जीव द्वारा प्रभु के इस इशारे को अनसुना कर देना ही उसके दुःखों का कारण है। जिस दिन उसकी समझ में आ जाता है, कि मेरे प्रभु मुझे बुला रहे हैं और वह सब छोड़कर उस प्रभु के शरणागत हो जाता है, उसी दिन प्रभु द्वारा भी उसे अपनी सामीप्यता का परम आनंद प्रदान कर दिया जाता है। जिस रस की प्राप्ति को ब्रह्मा, शंकर आदि लालायित रहते हैं, उस रस को बृज की गोपियाँ प्राप्त करती हैं। जीव और ब्रह्म की एक रूपता का महामहोत्सव ही महारास है।