गुरु पूर्णिमा आज: गुरु का स्थान ऊंचा

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आज का पंचांग

आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़ |आज है पूर्णिमा व्रत, पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, सत्य व्रत, व्यास पूजा and सत्य व्रत

आज पूर्णिमा तिथि 02:06 AM तक उपरांत प्रतिपदा | नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा | इन्द्र योग 09:37 PM तक, उसके बाद वैधृति योग | करण विष्टि 01:55 PM तक, बाद बव 02:06 AM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 02:12 PM – 03:52 PM है | आज चन्द्रमा धनु राशि पर संचार करेगा

  1. विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – आषाढ़
  4. अमांत – आषाढ़

तिथि

  1. शुक्ल पक्ष पूर्णिमा   – Jul 10 01:37 AM – Jul 11 02:06 AM
  2. कृष्ण पक्ष प्रतिपदा   – Jul 11 02:06 AM – Jul 12 02:08 AM

नक्षत्र

  1. पूर्वाषाढ़ा – Jul 10 04:49 AM – Jul 11 05:56 AM

गुरु का स्थान ऊंचा

आज आषाढ़ मास की पूर्णिमा है। इस तिथि पर गुरु पूजा का महापर्व गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। आम इंसान ही नहीं, भगवान ने भी गुरु से ज्ञान प्राप्त किया है। गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जन्म तिथि है। वेदव्यास ने वेदों का संपादन किया। 18 मुख्य पुराणों के साथ ही महाभारत, श्रीमद् भागवत कथा जैसे ग्रंथों की रचना की थी।

श्रीराम ने ऋषि वशिष्ठ और विश्वामित्र से ज्ञान प्राप्त किया, श्रीकृष्ण के गुरु सांदीपनि थे। हनुमानजी ने सूर्य देव को अपना गुरु बनाया था। भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए थे। इसीलिए गुरु का स्थान सबसे ऊंचा माना गया है।

गुरु पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम करें

संत, महात्मा और आध्यात्मिक गुरु इस दिन विशेष प्रवचन, सत्संग और भंडारे का आयोजन करते हैं, ऐसे आयोजन में शामिल होना चाहिए।

गुरु को श्रद्धा पूर्वक दक्षिणा (दान) देना प्राचीन परंपरा है। ये धन के साथ-साथ सेवा या विद्या अर्जन के रूप में भी दी जाती है। यदि संभव हो तो गुरु के चरण स्पर्श करें, उन्हें वंदन करें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें।

श्रीमद्भगवद्गीता, गुरु गीता, वेदव्यास अष्टकम या किसी अन्य गुरु उपदेशात्मक ग्रंथ का पाठ करें।

गरीबों, ब्राह्मणों, विद्यार्थियों और जरूरतमंदों को दान करें। अन्न, वस्त्र, छाता, पंखा आदि का दान कर सकते हैं।

कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं। फलाहार लेते हैं और अपने आहार, वाणी व विचारों में संयम रखते हैं।

गुरु पूर्णिमा एक प्रेरणादायक अवसर है। इस दिन आत्मिक उन्नति, सकारात्मक जीवनशैली, और अध्ययन के लिए नए संकल्प लेना चाहिए।

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