आज का पंचांग : मन को शांति कैसे मिल सकती है?

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़ |

आज चतुर्दशी तिथि 01:37 AM तक उपरांत पूर्णिमा | नक्षत्र मूल 04:49 AM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा ब्रह्म योग 10:08 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग | करण गर 01:11 PM तक, बाद वणिज 01:37 AM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 1:32 PM – 03:12 PM है | आज चन्द्रमा धनु राशि पर संचार करेगा

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – आषाढ़
  4. अमांत – आषाढ़

तिथि

  1. शुक्ल पक्ष चतुर्दशी   – Jul 09 12:38 AM – Jul 10 01:37 AM
  2. शुक्ल पक्ष पूर्णिमा   – Jul 10 01:37 AM – Jul 11 02:06 AM

नक्षत्र

  1. मूल – Jul 09 03:15 AM – Jul 10 04:49 AM
  2. पूर्वाषाढ़ा – Jul 10 04:49 AM – Jul 11 05:56 AM

करण

  1. गर – Jul 09 12:38 AM – Jul 09 01:11 PM
  2. वणिज – Jul 09 01:11 PM – Jul 10 01:37 AM
  3. विष्टि – Jul 10 01:37 AM – Jul 10 01:55 PM

योग

  1. ब्रह्म – Jul 08 10:17 PM – Jul 09 10:08 PM
  2. इन्द्र – Jul 09 10:08 PM – Jul 10 09:37 PM

वार

  1. बुधवार

सूर्य और चंद्रमा का समय

  1. सूर्योदय – 5:51 AM
  2. सूर्यास्त – 7:12 PM
  3. चन्द्रोदय – Jul 09 6:19 PM
  4. चन्द्रास्त – Jul 10 4:55 AM

अशुभ काल

  1. राहू – 12:32 PM – 2:12 PM
  2. यम गण्ड – 7:31 AM – 9:12 AM
  3. कुलिक – 10:52 AM – 12:32 PM
  4. दुर्मुहूर्त – 12:05 PM – 12:58 PM
  5. वर्ज्यम् – 11:46 AM – 01:28 PM, 03:07 AM – 04:49 AM

शुभ काल

  1. अभिजीत मुहूर्त – Nil
  2. अमृत काल – 10:04 PM – 11:46 PM
  3. ब्रह्म मुहूर्त – 04:15 AM – 05:03 AM

आनन्दादि योग

  1. ध्वजा (केतु) Upto – 04:49 AM
  2. श्रीवत्स

सूर्या राशि

  1. सूर्य मिथुन राशि पर है

चंद्र राशि

  1. चन्द्रमा धनु राशि पर संचार करेगा (पूरा दिन-रात)

चन्द्र मास

  1. अमांत – आषाढ़
  2. पूर्णिमांत – आषाढ़
  3. शक संवत (राष्ट्रीय कलैण्डर) – आषाढ़ 18, 1947
  4. वैदिक ऋतु – ग्रीष्म
  5. द्रिक ऋतु – वर्षा

Chandrashtama

  1. 1. Krithika Last 3 padam, Rohini , Mrigashirsha First 2 padam

गण्डमूल नक्षत्र

  1. 1. Jul 09 03:15 AM – Jul 10 04:49 AM (Moola)

आज का भगवद् चिंतन


हृदय और बुद्धि

विश्वास का जन्म सदैव हृदय से ही होता है। बुद्धि की प्रधानता जीवन में अविश्वास का एक प्रमुख कारण है क्योंकि बुद्धि तर्क प्रधान होती है और वह सदैव नयें-नयें तर्कों को जन्म देती रहती है। बुद्धिमान होना बहुत अच्छी बात है, लेकिन हृदयवान होना उससे भी बड़ी बात और जीवन की अनिवार्यता है। मानव जीवन में जितना भी आंतरिक सुख है, वह बुद्धि के कारण नहीं अपितु हृदय के ही कारण है।

बुद्धि केवल स्वयं का हित सोचती है, लेकिन हृदय द्वारा सर्व मंगल की कामना की जाती है। हमारी सनातन परम्परा में सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना ही हमारे मनीषियों के उदार हृदय को दर्शाती है। जहाँ हृदय है-वहाँ विश्वास है, जहाँ विश्वास है-वहाँ आत्मीयता है, जहाँ आत्मीयता है-वहाँ सर्व मंगल की कामना है और जहाँ सर्व मंगल की कामना है, वहीं ईश्वर की निकटता का मार्ग भी है। जीवन बुद्धि प्रधान नहीं, हृदय प्रधान होना चाहिए।

प्रभात चिंतन

याचका: नैव याचन्ते
बोधयन्ति गृहे गृहे l
दीयतां दीयतां नित्यम्
अदातु: फलमीदृशम् ll

भावार्थ:- भिक्षुक सबके घर में सिर्फ भिक्षा मांगने नहीं आते बल्कि वह हमें ज्ञान देते हैं कि दे दो, दे दो ! नहीं देने का फल मेरे जैसे होगा। इस जन्म में नहीं दिया तो अगले जन्म में जरुर मेरी तरह तुम्हें भी भिक्षा मांगनी पड़ेगी।

मन को शांति कैसे मिल सकती है?

पुराने समय में एक राजा के पास महल, सेवक, स्वादिष्ट भोजन सब कुछ था, लेकिन फिर भी उसका मन हमेशा बेचैन रहता था। एक परेशानी जाती तो दूसरी आ जाती।

एक दिन राजा अपने राज्य में घूमने निकला। रास्ते में उसे एक संत की छोटी सी कुटिया दिखाई दी। राजा उनके पास गया। संत ध्यान में बैठे थे। जब उन्होंने आंखें खोलीं, तो राजा ने उन्हें प्रणाम किया और बोला, “गुरुदेव, मेरे पास सब कुछ है, लेकिन फिर भी मैं परेशान रहता हूं। कृपया कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे मेरी सभी समस्याएं खत्म हो जाएं।”

संत ने कहा, “ध्यान करो, मन शांत हो जाएगा।”

राजा ने आंखें बंद कीं, लेकिन दिमाग में बहुत सारी बातें घूमती रहीं। उसने कहा, “गुरुदेव, मेरे लिए ध्यान करना बहुत कठिन है।”

संत मुस्कराए और बोले, “कोई बात नहीं, चलो बाग में टहलते हैं।”

वे बाग में पहुंचे। राजा का हाथ गलती से एक कांटेदार पौधे से छू गया और उसे कांटा चुभ गया। खून निकलने लगा। संत ने उसका इलाज किया और बोले, “राजन्, एक छोटा सा कांटा चुभा तो खून निकला और दर्द हुआ। सोचो, जब मन में गुस्सा, लालच, जलन जैसे बड़े कांटे चुभे हों तो कितनी पीड़ा होती होगी।”

संत ने आगे कहा, “जब तक मन से ये कांटे नहीं निकलते, शांति नहीं मिल सकती। इन्हें छोड़ दो, तभी जीवन में सच्चा सुख आएगा।”

राजा को संत की बातें समझ आ गईं। राजा ने ये बुराइयां छोड़ने का संकल्प लिया और इसके बाद उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगे।

कहानी से सीख सकते हैं ये 5 सूत्र

बाहरी सुख सीमित हैं, आंतरिक शांति अनंत है

राजा की तरह आज के जीवन में भी हमारे पास सुविधाएं हो सकती हैं, लेकिन जब तक मन में बेचैनी है, संतोष नहीं है, तब तक खुशी अधूरी रहती है।

ध्यान केवल आंखें बंद करने का नाम नहीं

शुरुआत में ध्यान कठिन लग सकता है, जैसे राजा को लगा, लेकिन धीरे-धीरे ये मन के कांटों को निकालने का एक सशक्त माध्यम बनता है। ध्यान से लालच, क्रोध जैसे बुराइयां दूर हो सकती हैं।

मन के कांटे पहचानें और निकालें

गुस्सा कब आता है? उसे समझें। लालच किस चीज के लिए है? क्या वह वाकई जरूरी है? किससे जलन होती है और क्यों? इन सवालों के जवाब तलाशें और रोज थोड़ा-थोड़ा इन भावनाओं से दूरी बनाएं।

प्राकृतिक जीवनशैली अपनाएं

संत का कुटिया में रहना, बाग में घूमना, यह सब जीवन की सादगी को दर्शाता है। शांति के लिए हमें भी रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़ा समय प्रकृति के साथ बिताना चाहिए।

समस्याओं का समाधान बाहर नहीं, भीतर है

हर इंसान सोचता है कि कोई उपाय मिल जाए, जिससे सारी समस्याएं खत्म हो जाएं, लेकिन असली उपाय खुद के भीतर झांकने में है।