श्रावण पूर्णिमा शुक्रवार को दोपहर 1:42 बजे लग गई थी और आज नौ अगस्त शनिवार को दिन में 1:24 बजे तक रहेगी
पंडित उदय शंकर भट्ट
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को सावन पूर्णिमा के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु, उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। इसके साथ ही भाई अपनी बहन को उपहार देने के साथ रक्षा करना वचन देता है। ये पर्व देश के कोने-कोने में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल रक्षाबंधन पर करीब 100 साल बाद ऐसा हो रहा है जब भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में रक्षाबंधन के दिन कई गुना अधिक शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।
पंचांग के अनुसार श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस बार श्रावण पूर्णिमा तिथि 08 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से लग चुकी है जो 09 अगस्त यानी आज दोपहर 01 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इस समय पर राखी बांधना शुभ माना जाता है इस तरह के उदया तिथि के अनुसार रक्षाबंधन आज मनाया जा रहा है। भाई-बहन के पवित्र प्रेम का पर्व रक्षा बंधन इस साल भद्रा के साये से मुक्त रहेगा, हालांकि सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक राहुकाल रहेगा ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल के दौरान राखी बांधना और किसी भी शुभ कार्य को करना उचित नहीं माना जाता है। ज्योतिषीय गण के अनुसार, इस बार भद्रा का अशुभ काल सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, जिससे बहनें दोपहर तक राखी बांध सकेंगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, सौभाग्य और शोभन जैसे कई महासंयोग बन रहे हैं, जो इस त्योहार की शुभता को और बढ़ा रहे हैं।
राखी बांधते समय इस मंत्र का करें जाप
“येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
अर्थ- जिस पवित्र सूत्र से महान दानवीर राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांध रही हूँ। हे रक्षा सूत्र! तुम स्थिर रहो, कभी ढीले या विचलित न हो।