आज कन्या संक्रान्ति: प्रभु के बनकर रहें

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है। आज कन्या संक्रान्ति है।

सूर्य देव एक राशि में 30 दिनों तक रहते हैं। इसके बाद राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्य देव के राशि परिवर्तन की तिथि पर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य देव की पूजा करने से साधक की मनोकामना पूरी होती है। साथ ही जातक सेहतमंद रहता है। इस शुभ अवसर पर साधक भक्ति भाव से सूर्य देव की पूजा करते हैं।

कन्या संक्रान्ति पुण्य काल – 12:16 पी एम से 06:25 पी एम
अवधि – 06 घण्टे 09 मिनट्स
कन्या संक्रान्ति महा पुण्य काल – 04:22 पी एम से 06:25 पी एम
अवधि – 02 घण्टे 03 मिनट्स

कन्या संक्रांति का धार्मिक महत्व

• आत्मा के कारक सूर्य देव सिंह राशि के स्वामी हैं।

• वर्तमान समय में सूर्य देव सिंह राशि में विराजमान हैं।

• सूर्य देव की पूजा करने से करियर को नया आयाम मिलता है।

• इस तिथि पर गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान ध्यान किया जाता है। इसके साथ ही पूजा, जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है।

• यह पर्व सूर्य देव के राशि परिवर्तन की तिथि पर मनाया जाता

है। इस शुभ अवसर पर सूर्य देव की उपासना की जाती है।

• सूर्य देव की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

आज का विचार

व्यक्ति अकेला पैदा होता है और अकेला मर जाता है। वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है और अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है।

 आज का भगवद् चिन्तन

 प्रभु के बनकर रहें

जिस प्रकार किसी बूँद का अंतिम लक्ष्य सागर ही होता है उसी प्रकार जीव का अंतिम लक्ष्य भी एकमात्र प्रभु हैं। तुम भले हो, बुरे हो, सज्जन हो, दुर्जन हो, पापी हो, पुण्यात्मा हो अथवा जैसे भी हो बस उस प्रभु के बनकर रहो। अपनी दुर्बलता का ज्यादा विचार करोगे तो आपके भीतर हीन भाव आ जायेगा और अपने सत्कर्मों व गुणों का ज्यादा बखान करोगे तो अहम भाव आ जायेगा। वास्तविकता तो यही है कि जीव की कोई सामर्थ्य नहीं है।

जीवन की जो भी प्राप्ति है, सब प्रभु की कृपा ही है। गोविन्द की कृपा के बल पर ही काम-क्रोध और विषय-वासना से मुक्त हुआ जा सकता है और उनकी कृपा से ही माया पर विजय प्राप्त की जा सकती है। जीवन में सदैव इस बात के लिए प्रयत्नशील बने रहें कि प्रभु चरणों में हमारी प्रीति बढ़ती रहे, संत वचनों में विश्वास बढ़ता रहे और प्रभु कथा में अनुराग बढ़ता रहे। तुम्हें प्रभु सन्मुख होने की देरी है फिर जैसे भी हों उस प्रभु के ऊपर छोड़ दीजिए, प्रभु सब संभाल लेंगे यही शरणागत जीव का स्वभाव भी है।