पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
कार्तिक कृष्ण पक्ष षष्ठी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन |
आज षष्ठी तिथि 02:17 PM तक उपरांत सप्तमी | नक्षत्र म्रृगशीर्षा 01:36 PM तक उपरांत आद्रा | वरीयान योग 10:55 AM तक, उसके बाद परिघ योग | करण वणिज 02:17 PM तक, बाद विष्टि 01:16 AM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 04:33 PM – 06:00 PM है | आज चन्द्रमा मिथुन राशि पर संचार करेगा |
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – कार्तिक
- अमांत – आश्विन
तिथि
- कृष्ण पक्ष षष्ठी – Oct 11 04:43 PM – Oct 12 02:17 PM
- कृष्ण पक्ष सप्तमी – Oct 12 02:17 PM – Oct 13 12:24 PM
नक्षत्र
- म्रृगशीर्षा – Oct 11 03:20 PM – Oct 12 01:36 PM
- आद्रा – Oct 12 01:36 PM – Oct 13 12:26 PM
आज का विचार
कपड़े और चेहरे अक्सर झूठ बोला करते हैं, इंसान की असलियत तो वक्त बताता है। अच्छा इंसान मतलबी नही होता, बस दूर हो जाता है, उन लोगो से जिन्हें उसकी कद्र नही होती.!!
आज का भगवद् चिन्तन
निराशा से बचें
जीवन के प्रत्येक पल को आशा, विश्वास और प्रसन्नता के साथ जीकर उत्सव मनाना सीखिए क्योंकि मानव जीवन एवं बीता हुआ समय बार-बार नहीं मिलता है। निराश, हताश एवं उदास मन जीवन प्रगति में सबसे बड़े अवरोधक का कार्य करता है। निराशा अर्थात सफलता की दिशा में अपने बढ़ते हुए कदमों को रोककर परिस्थितियों के आगे हार मान लेना है। निराशा का अर्थ मनुष्य की उस मनोदशा से है, जिसमें स्वयं द्वारा किए जा रहे प्रयासों के प्रति अविश्वास उत्पन्न हो जाता है।
निराशा, जीवन और प्रसन्नता के बीच एक अवरोधक का कार्य करती है क्योंकि जिस जीवन में निराशा, कुंठा, हीनता आ जाए वहाँ सब कुछ होते हुए भी व्यक्ति दरिद्र, दुःखी और परेशान ही रहता है। स्वयं की क्षमताओं पर, प्रयासों पर और स्वयं पर भरोसा रखो। दुनिया में कोई भी अवरोधक ऐसा नहीं जो मनुष्य के प्रयासों से बड़ा हो, इसलिए जीवन को निराशा में नहीं प्राप्त्याशा में जियो।