आज का पंचांग : कर्म से भाग्य निर्माण

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष एकादशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, कार्तिक |आज है उत्पन्न एकादशी|

आज एकादशी तिथि 02:37 AM तक उपरांत द्वादशी | नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 11:34 PM तक उपरांत हस्त | विष्कुम्भ योग | करण बव 01:40 PM तक, बाद बालव 02:37 AM तक, बाद कौलव | आज राहु काल का समय 09:28 AM – 10:49 AM है | आज चन्द्रमा कन्या राशि पर संचार करेगा |

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – मार्गशीर्ष
  4. अमांत – कार्तिक

तिथि

  1. कृष्ण पक्ष एकादशी   – Nov 15 12:50 AM – Nov 16 02:37 AM
  2. कृष्ण पक्ष द्वादशी   – Nov 16 02:37 AM – Nov 17 04:47 AM

नक्षत्र

  1. उत्तर फाल्गुनी – Nov 14 09:20 PM – Nov 15 11:34 PM
  2. हस्त – Nov 15 11:34 PM – Nov 17 02:11 AM

आज का भगवद् चिन्तन
कर्म से भाग्य निर्माण

कर्म ही हमारे भाग्य के निर्माता होते हैं। सदैव अच्छा करो और निश्चिंत हो जाओ क्योंकि समय लग सकता है, लेकिन आपने फूलों का बीज बोया है तो आपके आंगन में फूल ही खिलने वाले हैं। वर्तमान के अच्छे-बुरे कर्म ही भविष्य में हमारे भाग्य का निर्धारण करने वाले हैं। परमात्मा से कभी शिकायत मत किया करो क्योंकि आप अभी इतने समझदार नहीं हुए कि उसके इरादे समझ सकें।

यदि उस ईश्वर ने आपकी झोली खाली की है तो चिंता मत करना क्योंकि शायद वह पहले से कुछ बेहतर उसमें डालना चाहता है। आपके पास समय हो तो उसे दूसरों के भाग्य को सराहने में न लगाकर स्वयं के भाग्य को सुधारने में लगाओ। परमात्मा भाग्य का चित्र अवश्य बनाता है, लेकिन उसमें कर्म रुपी रंग तो हमारे द्वारा स्वयं ही भरा जाता है। श्रेष्ठ कर्म ही श्रेष्ठ भाग्य का निर्माण करते हैं।

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