पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आज्ञा देने वाले और मानने वाले, दोनों को लगता है कि आज्ञा नहीं मानी तो अहंकार को चोट लगेगी, मान ली तो भी अहंकार आहत होगा। आज एक बार संस्कारी बच्चे मिल जाएंगे पर आज्ञाकारी बच्चे कम ही मिलते हैं। कोई किसी को सुनना नहीं चाहता। लगता है सब बहरे हो गए हैं। घरों में लोग एक-दूसरे पर जोर से ही बोल रहे हैं। एक वक्त था जब लोग घरों में बड़े-बूढ़ों की आंखें देखकर आज्ञा समझ जाते थे। राम कथा का एक प्रसंग याद रखिए।

दशरथ ने आज्ञा दी कि राम को वनवासी वेश में 14 वर्ष के लिए जाना है। राम ने आज्ञा मान ली। कुछ दिनों बाद दशरथ के मंत्री सुमंत ने कहा कि आपके पिताजी ने मुझे आदेश दिया है कि मैं आपको चार दिन घुमाऊं और वापस ले चलूं- लखनु रामु सिय आनेहु फेरी। राम जिन्होंने पहली आज्ञा मानी थी, दूसरी आज्ञा के लिए तुरंत सुमंत को कहते हैं- पहली आज्ञा मेरे पिता ने धर्म के पालन के लिए दी थी और दूसरी आज्ञा मोह में डूबी हुई है। मुझमें इतना विवेक है कि कौन-सी आज्ञा मानी जाए और कौन-सी नहीं।
आज का भगवद् चिन्तन
जीवन का स्वरूप
परिवर्तन जीवन का स्वभाव है इसलिए जीवन को इसी रूप में स्वीकार भी किया जाना चाहिए। जो बीज अपने अस्तित्व को नहीं मिटाना चाहता अथवा धरती के गर्भ में प्रवेश नहीं करना चाहता, उस की वृक्ष बनने की सम्भावनाएँ भी नष्ट हो जाती हैं। परिवर्तन संसार का नियम है, संसार के इस नियम की स्वीकारोक्ति हमारे जीवन में अवश्य होनी ही चाहिए। जिन लोगों की मनःस्थिति इस नियम को स्वीकार नहीं कर पाती, निश्चित ही उनके जीवन में सुख-शांति की फसल भी नहीं उग पाती है।
जीवन में सदैव एक जैसी स्थिति-परिस्थिति नहीं रह सकती है। आप जितना समय की विपरीत धारा में बहोगे उतना परिश्रम और द्वंद का सामना भी करना ही पड़ेगा। जीवन का एक सीधा सा नियम है, कि जो मनुष्य परिवर्तन को स्वीकार नहीं करता वो अपने जीवन आनंद की संभावनाओं को भी कम कर देता है। यहाँ परिस्थितियाँ एक जैसी कभी भी नहीं रहती हैं। सर्दी के बाद गर्मी, रात के बाद दिन, पतझड़ के बाद बसन्त और दुःख के बाद सुख आने ही वाला है।