आज का पंचांग : बच्चों को मानसिक तनाव से दूर रखने के लिए ध्यान से जोड़ें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

Uttarakhand

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आज माता-पिता अपने बच्चों की मेंटल हेल्थ को लेकर बड़े परेशान हैं। पूरी दुनिया में भारत के युवा सबसे ज्यादा करियर ओरिएंटेड माने जाते हैं। तो भविष्य के प्रति यह गंभीरता तो युवा पीढ़ी में है, लेकिन जब यह बचपन युवा होगा, तब क्या होगा?

ऐसा कहते हैं कि इच्छा की यात्रा पर निकले हुए व्यक्ति अपनी नींद खो देते हैं। इच्छा रखना मनुष्य का स्वभाव है। फिर इच्छा लालसा में बदलती है। लालसा वासना में तब्दील होती है और वासना फिर परेशान करती है।

पहले युवा लोग बहुत जल्दी प्रतिक्रिया देते थे। लेकिन अब बच्चे भी ऐसा करने लग गए हैं। एक्शन में उतनी ऊर्जा नहीं लगती, जितनी रिएक्शन में खर्च हो जाती है। मनुष्य के मन में एक चुम्बक होता है। हम जो सोचते हैं, उस परिस्थिति को वो खींचता है।

आज बचपन जो सोच रहा है, उसकी जरूरत उस उम्र में नहीं है। और उम्र से पहले ही कुछ बातें यदि मन में उतर जाएं तो उसकी प्रतिक्रिया खतरनाक ही होती है। बच्चों की मेंटल हेल्थ को यदि ठीक रखना है तो समय रहते उनको मेडिटेशन से जरूर जोड़ा जाए।

Uttarakhand Uttarakhand

आज का विचार

जिनका स्वभाव अच्छा होता है उन्हें कभी प्रभाव दिखाने की जरूरत नहीं होती है.!!

आज का भगवद् चिंतन
जीवन में पवित्रता रखें

असत्य का आश्रय व्यक्ति को भीतर से कमजोर बना देता है। जिह्वा में सत्यता रहे, चेहरे में प्रसन्नता रहे और हृदय में पवित्रता रहे तो इससे बढ़कर सुखद एवं श्रेष्ठ जीवन कुछ और नहीं हो सकता है। निश्चित ही असत्य हमें भीतर से कमजोर बना देता है। असत्य भाषित करने वालों का आत्मबल भी बड़ा कमजोर होता है। जो लोग अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहते हैं वही सबसे अधिक असत्य का भाषण भी करते हैं। हमें सत्य का आश्रय लेकर एक जिम्मेदार व्यक्ति बनने का सतत प्रयास करना चाहिए।

Uttarakhand UttarakhandUttarakhand

उदासीन मन से किये गये प्रत्येक कर्म में पूर्णता एवं कुशलता का अभाव पाया जाता है। इसलिए सदैव प्रयास करना चाहिए कि हमारे द्वारा प्रत्येक कर्म को प्रसन्नता के साथ सम्पन्न किया जाए। निष्कपट, निर्दोष और निर्वैर भाव ही हृदय की पवित्रता है। यदि जीवन में कोई बहुत बड़ी उपलब्धि है तो वह हमारे हृदय की पवित्रता है। पवित्र हृदय से किये गये कार्य भी पवित्र ही होते हैं। जिनका हृदय पवित्र होता है, उनका जीवन भी पवित्र बन जाता है।