पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आश्विन कृष्ण पक्ष सप्तमी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, भाद्रपद |आज है मध्य अष्टमी, कालाष्टमी और श्रीमहालक्ष्मी व्रत समाप्त|
आज सप्तमी तिथि 07:59 AM तक उपरांत अष्टमी तिथि 05:51 AM तक उपरांत नवमी | नक्षत्र आद्रा 01:29 AM तक उपरांत पुनर्वसु | वरीयान योग 03:21 PM तक, उसके बाद परिघ योग | करण बव 08:00 AM तक, बाद बालव 06:55 PM तक, बाद कौलव 05:52 AM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 09:19 AM – 10:47 AM है | आज चन्द्रमा मिथुन राशि पर संचार करेगा.
तन से पहले मन को स्वस्थ करें
आज चिकित्सा-विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर मानसिक अवस्था का गहरा प्रभाव पड़ता है। मन भले ही कोई दिखाई देने वाला अंग नहीं है, लेकिन उसके प्रभावों को शरीर में स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है। मन कोई अंग नहीं, एक अवस्था है—और इस अवस्था का निर्माण बहुत हद तक हम स्वयं करते हैं।
मन बड़ा चंचल और शक्तिशाली है। कई बार तन उसकी इच्छाओं के सामने कमजोर पड़ जाता है। अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मन शरीर की सीमाओं की भी उपेक्षा कर देता है। हम जानते हैं कि कोई काम हमारे लिए उचित नहीं है, फिर भी भीतर से उठी कोई अदृश्य प्रेरणा हमें वही करने के लिए विवश कर देती है।
थोड़ा ठहरकर अपने भीतर झांकें तो अनुभव होगा कि हमारे भीतर एक ऐसी शक्ति सक्रिय रहती है, जिसे हम ‘मन’ कहते हैं। वह कई बार हमारी इच्छा के विपरीत भी हमें किसी कर्म की ओर ले जाती है। यही कारण है कि केवल शरीर को साध लेना पर्याप्त नहीं; मन को समझना और साधना उससे भी अधिक आवश्यक है।
अध्यात्म की दृष्टि में जब मन की चंचलता कम होती है, इच्छाओं का शोर शांत होता है और भीतर संतुलन स्थापित होता है, तब उसका सकारात्मक प्रभाव तन पर भी पड़ता है। इसलिए आज आवश्यकता केवल फिजिकल हेल्थ पर ध्यान देने की नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ को भी उतनी ही गंभीरता से समझने और संवारने की है।
क्योंकि स्वस्थ शरीर के पीछे शांत और संतुलित मन की बड़ी भूमिका होती है।
24 घंटे में से कुछ समय स्वयं के लिए निकालें। योग करें, प्राणायाम करें और विशेष रूप से ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। ध्यान मन को दबाने का नहीं, उसे देखने, समझने और धीरे-धीरे साधने का मार्ग है।
तन को स्वस्थ रखना है तो मन को समझना होगा।
मन पर राज करना है तो ध्यान को जीवन में उतारना होगा।
अंततः स्वास्थ्य केवल शरीर की स्थिति नहीं,
तन और मन के संतुलन का नाम है।