पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आश्विन कृष्ण पक्ष नवमी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, भाद्रपद |आज है नवमी.
आज नवमी तिथि 03:54 AM तक उपरांत दशमी | नक्षत्र पुनर्वसु 12:13 AM तक उपरांत पुष्य | परिघ योग 12:31 PM तक, उसके बाद शिव योग | करण तैतिल 04:51 PM तक, बाद गर 03:54 AM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 04:39 PM – 06:07 PM है | आज 06:31 PM तक चन्द्रमा मिथुन उपरांत कर्क राशि पर संचार करेगा.
जन-जागरण : बाहर की दुनिया को नहीं, पहले स्वयं को जगाने की प्रक्रिया
समाजसेवा की दुनिया में एक शब्द अक्सर सुनाई देता है—जन-जागरण।
लेकिन जन-जागरण का अर्थ केवल लोगों को किसी बात के लिए जागरूक कर देना नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ है—मनुष्य को इतना सजग बना देना कि वह स्वयं यह पहचान सके कि जो वह कर रहा है, वह सही है या गलत।
कहा जाता है कि इस अर्थ में जन-जागरण की सबसे बड़ी भूमिका श्रीराम के जीवन में दिखाई देती है। उनका उद्देश्य केवल रावण का अंत करना नहीं था। रावण एक व्यक्ति मात्र नहीं, बल्कि एक प्रवृत्ति का प्रतीक था। इसलिए संघर्ष केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध नहीं था; वह समाज के भीतर सोई हुई चेतना को जगाने का भी प्रयास था।
मनुष्य को जगाना है तो उसके भीतर विवेक जगाना होगा।
और जब यह विवेक निर्भयता और निष्काम भाव से जुड़ता है, तब जन-जागरण केवल सामाजिक अभियान नहीं रहता, वह मानव-मूल्यों की यात्रा बन जाता है।
आज हमारे सामने एक नया माध्यम है—कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यानी AI।
AI सूचना दे सकता है, विकल्प दे सकता है, तर्क प्रस्तुत कर सकता है और कई बार हमारे विचारों को व्यवस्थित भी कर सकता है। लेकिन एक प्रश्न अभी भी हमारे सामने खड़ा है—
क्या AI हमारे भीतर का नैतिक विवेक भी जगा सकता है?
यहीं से एक नई चुनौती शुरू होती है।
यदि मनुष्य धीरे-धीरे अपने निर्णयों का आत्ममूल्यांकन करना छोड़ दे और हर निर्णय के बाद केवल यह पुष्टि कराने लगे कि “जो मैंने किया, क्या वह सही था?” तो संभव है कि एक दिन स्वयं से प्रश्न करने की हमारी आदत ही समाप्त हो जाए।
हम सही होने के लिए नहीं, बल्कि अपने सही होने की पुष्टि पाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने लगें।
और यही सबसे सूक्ष्म खतरा है।
क्योंकि समस्या केवल गलत काम करने की नहीं है। समस्या यह भी है कि कहीं हम अपने स्वार्थ को सही सिद्ध करने के लिए सही शब्दों का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे?
एक चोर चोरी करता है, इसलिए हम उसकी निंदा करते हैं।
लेकिन थोड़ा ठहरकर देखें…
जिस वस्तु को उसने गलत तरीके से प्राप्त किया, यदि वही वस्तु हमें ईमानदारी से उपलब्ध हो जाए, तो क्या हमारी मानसिकता हमेशा उससे अलग होगी?
अंतर केवल कर्म का नहीं है।
उसके पीछे छिपी आसक्ति को देखना होगा।
चोर की बेईमानी के पीछे किसी वस्तु, धन या इच्छा के प्रति आसक्ति थी। उसी आसक्ति ने उसे गलत रास्ते पर धकेला।
लेकिन यदि हमारी तथाकथित ईमानदारी के पीछे भी किसी वस्तु, पद, प्रतिष्ठा, लाभ या अपने विचार को सही सिद्ध करने की आसक्ति छिपी हो, तो हमारी ईमानदारी भी धीरे-धीरे बेईमानी का एक परिष्कृत रूप बन सकती है।
इसलिए असली जन-जागरण बाहर की दुनिया को बदलने से पहले अपने भीतर देखने की क्षमता जगाना है।
AI हमें उत्तर दे सकता है।
लेकिन यह प्रश्न हमें स्वयं से पूछना होगा—
“मैं जो कर रहा हूँ, उसे सही साबित करना चाहता हूँ या वास्तव में सही करना चाहता हूँ?”
शायद यही वह अंतर है जहाँ सूचना समाप्त होती है और चेतना शुरू होती है।
और शायद आज के समय में सबसे बड़ा जन-जागरण यही है—
दूसरों को जगाने से पहले स्वयं को जगाना।