पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष द्वादशी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |आज है अनंग त्रयोदशी व्रत, भौम प्रदोष व्रत and प्रदोष व्रत|
आज द्वादशी तिथि 03:57 PM तक उपरांत त्रयोदशी | नक्षत्र अश्विनी 08:51 PM तक उपरांत भरणी | वरीयान योग 09:08 PM तक, उसके बाद परिघ योग | करण बालव 03:57 PM तक, बाद कौलव 02:14 AM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 02:56 PM – 04:16 PM है | आज चन्द्रमा मेष राशि पर संचार करेगा |
तीन बातों से हमारा संचालन होता है। शरीर स्वस्थ हो, मन निष्क्रिय रहे और आत्मा का बोध बना रहे। अगर हम शरीर के साथ छेड़छाड़ करें, उसे रोगी बनने का अवसर दें तो हमारे सारे क्रियाकलाप हमें दुःखी करेंगे। जिसका मन सक्रिय है, वो कभी शांत रह ही नहीं सकता।
अशांति मिटाने के लिए मन को निष्क्रिय करना ही पड़ेगा। और आत्मा का बोध हमारे आचरण को दिव्य बनाता है। जब हम मन से संचालित होते हैं तो हर बात पर इंस्टैंट रिएक्शन करते हैं और यह त्वरित प्रतिक्रिया की आदत हमें बेचैन कर देती है।
जब हम बुद्धि से संचालित होते हैं, तो हमारी विचारशील प्रक्रिया होती है। और ये कॉन्शस रिस्पॉन्स हमें गहराई दे जाता है। श्रीराम के आचरण में ये बातें देखी जा सकती हैं। राम इतने गहरे व्यक्ति थे कि उन्होंने सुविधा में संघर्ष चुना। हमेशा उन लोगों को प्राथमिकता दी, जो वंचित थे। असहाय लोगों का सहारा बने, इसीलिए उनका जीवन लोक शिक्षण का प्रतीक बन गया।