आज का पंचांग : भगवान विष्णु,श्रीकृष्ण, शिव जी और चंद्रदेव की पूजा एक साथ करने का शुभ योग, गीता ग्रंथ का करें दान

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |आज है मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती|

आज एकादशी तिथि 07:01 PM तक उपरांत द्वादशी | नक्षत्र रेवती 11:18 PM तक उपरांत अश्विनी | व्यातीपात योग 12:58 AM तक, उसके बाद वरीयान योग | करण वणिज 08:20 AM तक, बाद विष्टि 07:01 PM तक, बाद बव 05:33 AM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 08:15 AM – 09:35 AM है | आज 11:18 PM तक चन्द्रमा मीन उपरांत मेष राशि पर संचार करेगा |

आज सोमवार, 1 दिसंबर को मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी है, इसे मोक्षदा एकादशी कहते हैं। इसी तिथि पर द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। गीता का उपदेश आज भी जीवन में धर्म, कर्म और अध्यात्म का मार्गदर्शन करता है। मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास, पूजा-अर्चना, गीता का पाठ और दान करना चाहिए। आज सोमवार है, इसलिए भगवान शिव और चंद्र देव की पूजा भी जरूर करें।

गीता स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के मुख से उत्पन्न हुई है। मोक्षदा एकादशी का शाब्दिक अर्थ है मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी। इस दिन किए गए व्रत से भक्त को भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोक्ष का अर्थ है मृत्यु के बाद पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति और आत्मा का परमात्मा में विलीन होना।

मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। ये व्रत केवल स्वयं के लिए ही नहीं, बल्कि पूर्वजों के लिए भी किया जा सकता है। एकादशी व्रत करें और इस एकादशी का पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।

आज ऐसे कर सकते हैं पूजा-पाठ

मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और श्रीमद्भगवद्गीता की पूजा करने का विशेष महत्व है।

स्नान के बाद उगते सूर्य को जल अर्पित करें और पूजा का संकल्प लें।

घर के मंदिर में पीले और लाल वस्त्र से चौकी सजाएं। इस पर भगवान विष्णु और देवी महालक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। श्रीकृष्ण की मूर्ति और श्रीमद्भगवद्गीता भी रखें। इनके साथ शिवलिंग भी स्थापित करें।

मूर्तियों का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। चंदन से तिलक लगाएं।

तुलसी अर्पित करें। शिवलिंग पर बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाएं। शिव जी को तुलसी न चढ़ाएं।

घी का दीपक जलाएं, धूप करें और फल-मिठाई, पंचामृत अर्पित करें।

ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, कृं कृष्णाय नमः और ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। पूजा के अंत में दीपक और धूप के साथ आरती करें।

एकादशी व्रत रखने वाले भक्त को दिनभर निराहार रहना चाहिए। जो निराहार नहीं रह सकते, उन्हें एक समय फलाहार करना चाहिए। दूध और फलों के रस का सेवन कर सकते हैं।

जिन लोगों की कुंडली में चंद्र ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन्हें शिवलिंग पर विराजित चंद्रदेव की पूजा करनी चाहिए। पूजा में ऊँ सों सोमाय नमः मंत्र का जप करें।

मोक्षदा एकादशी का सबसे महत्वपूर्ण शुभ कर्म है -श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ। इस दिन गीता के कुछ अध्यायों या प्रसंगों का अध्ययन किया जा सकता है।

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