पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
विज्ञान का आधार खोज रहा है। और हमारे ऋषि-मुनियों का आधार ढूंढना रहा है। खोजी वो वस्तु जाती है, जो हमारे पास पहले थी नहीं। ढूंढना उस वस्तु को पड़ता है, जो पहले से हमारे पास है पर हम कहीं भूल गए। जैसे सनातन धर्म में सनातन का अर्थ है शाश्वत यानी जो हमेशा से है। लेकिन आजकल भ्रम के कारण इसका अर्थ अलग ले लिया जाता है।
कुछ साल पहले अगर कोई जयश्री राम बोले तो माना जाता था ये एक विशेष राजनीतिक दल से जुड़े हैं। जबकि भगवान का नाम है। ऐसे ही आज सनातन को राजनीति का विषय न बनाया जाए। इसकी कल्पना बड़ी वैज्ञानिक है। इसमें मनुष्य के जीने के वो सारे नियम हैं, जिनकी खोज विज्ञान ने की।
विज्ञान कहता है, हम खोजकर ही मानेंगे। जबकि सनातन में कहा है कि हमने पहले ही मान लिया है कि एक परमशक्ति है, आराम से ढूंढेंगे। सनातन सिखाता है जीवन में संतुलन, तालमेल और संयम से काम लें। सनातन आदर्श-वाक्य होना चाहिए, क्योंकि उसमें मनुष्य के भविष्य की सबसे सुंदर जीवनशैली समाई है।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, श्रावण |आज है संकष्टी गणेश चतुर्थी, हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी, अंगारकी चतुर्थी
आज तृतीया तिथि 08:41 AM तक उपरांत चतुर्थी | नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 11:52 AM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा | सुकर्मा योग 06:53 PM तक, उसके बाद धृति योग | करण विष्टि 08:41 AM तक, बाद बव 07:40 PM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 03:44 PM – 05:21 PM है | आज 06:10 AM तक चन्द्रमा कुंभ उपरांत मीन राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – भाद्रपद
- अमांत – श्रावण
तिथि
- कृष्ण पक्ष तृतीया – Aug 11 10:34 AM – Aug 12 08:41 AM
- कृष्ण पक्ष चतुर्थी – Aug 12 08:41 AM – Aug 13 06:36 AM
नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा – Aug 11 01:00 PM – Aug 12 11:52 AM
- उत्तरभाद्रपदा – Aug 12 11:52 AM – Aug 13 10:32 AM
आज का विचार
संतोष और गहरी नींद मिल जाने के बाद ईश्वर से कुछ भी मांगने को नहीं रह जाता सारी इच्छाओं का आनंद इन्हीं दो चीजों में है.!!_
आज का भगवद् चिन्तन
श्रीकृष्ण तत्व विचार
कर्म को ही योग बनाकर प्रसन्नतापूर्वक जीवन जीने की कला भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हम सबको सिखाता है। भगवान श्रीकृष्ण बहुआयामी व्यक्तित्व के भण्डार हैं। वो एक तरफ वंशीधर हैं तो दूसरी तरफ चक्रधर हैं, एक तरफ माखन चुराने वाले हैं तो दूसरी तरफ सृष्टि को खिलाने वाले हैं। वो एक तरफ बनवारी हैं तो दूसरी तरफ गिरधारी हैं और वो एक तरफ राधारमण हैं तो दूसरी तरफ रुक्मिणी हरण करने वाले हैं।
श्रीकृष्ण कभी शांतिदूत तो कभी क्रांतिदूत हैं, कभी माँ यशोदा तो कभी माँ देवकी के पूत हैं। कभी युद्ध का मैदान छोड़कर भागने का कृत्य, तो कभी सहस्रफन नाग के मस्तक पर नृत्य। जीवन को समग्रता, निर्भयता और पूर्णता से जीने का नाम ही कृष्ण है। श्रीकृष्ण का जीवन परिस्थितियों से भागना नहीं अपितु उनका डटकर सामना करना सिखाता है। यदि कर्म का उद्देश्य श्रेष्ठ, शुभ व पवित्र हो तो वही कर्म, सत्कर्म बन जाता है।