आज का पंचांग : खुशहाली के सूत्र

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आज कार्तिक कृष्ण पक्ष पंचमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन

आज पंचमी तिथि 04:43 PM तक उपरांत षष्ठी | नक्षत्र रोहिणी 03:20 PM तक उपरांत म्रृगशीर्षा | व्यातीपात योग 02:06 PM तक, उसके बाद वरीयान योग | करण तैतिल 04:44 PM तक, बाद गर 03:26 AM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 09:19 AM – 10:46 AM है | आज 02:24 AM तक चन्द्रमा वृषभ उपरांत मिथुन राशि पर संचार करेगा |

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – कार्तिक
  4. अमांत – आश्विन

तिथि

  1. कृष्ण पक्ष पंचमी   – Oct 10 07:38 PM – Oct 11 04:43 PM
  2. कृष्ण पक्ष षष्ठी   – Oct 11 04:43 PM – Oct 12 02:17 PM

नक्षत्र

  1. रोहिणी – Oct 10 05:31 PM – Oct 11 03:20 PM
  2. म्रृगशीर्षा – Oct 11 03:20 PM – Oct 12 01:36 PM

वैसे तो ढेर हमेशा कचरे का होता है, लेकिन इन दिनों जरा अपने आसपास देखिए, तो इंसानों का भी ढेर नजर आएगा। समूचा इंसान ढूंढना मुश्किल है। पूरा इंसान वो होता है, जो अपने सत्कर्मों से अपनी छवि बनाता है। प्रभु श्रीराम अपने छोटे भाई भरत को मनुष्य के शरीर का महत्व समझाते हुए एक अनूठी बात कहते हैं। और उनका कहना है, ‘अगर मनुष्य का शरीर मिला है, तो इसे केवल विषय-भोग में न लगाएं’। विषय-भोग मतलब सेक्शुअल टेंडेंसी।

हमारी काम ऊर्जा हमें वासनाओं में पटकती है। इसी काम ऊर्जा को हम राम ऊर्जा में भी बदल सकते हैं। ‘एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई। नर तनु पाइ बिषयं मन देहीं। पलटि सुधा ते सठ बिष लेहीं।’ ‘हे भाई, इस शरीर के प्राप्त होने का फल विषय भोग नहीं है। इस जगत के भोगों की तो बात ही क्या।

स्वर्ग का भोग भी बहुत थोड़ा है। और अंत में दुख देने वाला है।’ इसलिए हमारे भीतर जो ऊर्जा है, उसे हम अपनी नेतृत्व क्षमता की ओर मोड़ें। मनुष्य के भीतर दो विशेषताएं हैं- एक उसके सोचने की क्षमता और दूसरा आत्मा तक जाने की ताकत। यही बात मनुष्यों को पशु से अलग करती है। मनुष्य होना अद्भुत उपलब्धि है। इसका दुरुपयोग न करें।

आज का विचार

अहम से ऊँचा कोई आसमान नही, किसी की बुराई करने जैसा आसान कोई काम नहीं, स्वयं को पहचानने से अधिक कोई ज्ञान नहीं, और क्षमा करने से बड़ा कोई दान नहीं.

आज का भगवद् चिन्तन
खुशहाली के सूत्र

छोटा सा बदलाव जीवन में बड़ी खुशी का कारण बन जाता है। थोड़ा धैर्य रखें, थोड़ा सहन करें और थोड़ा अनदेखा कर दें, जीवन में खुशहाली के लिए इन तीन सूत्रों को अपनाना सीखिये। छोटी-छोटी बातों में विचलित हो जाना ही हमारे दुःखों का एक प्रमुख कारण भी है। पर्वत की तरह डिगे रहो, विपदाओं के तूफान आयेंगे तो सही, लेकिन टकराकर चले जायेंगे। धैर्य में ही दुःखों को धारण करने की क्षमता होती है।

अपने भीतर परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता उत्पन्न करो। जिसे सहना आ गया, समझो उसे दुनिया में खुश रहना भी आ गया। व्यवहार जगत में प्रतिदिन बहुत सारी ऐसी बातें भी होती हैं, जिन्हें गंभीरता से लेने की अपेक्षा अनदेखा कर देना ही हमारी प्रसन्नता का कारण होता है। जब निंदा हो, अपमान हो अथवा किसी की त्रुटियों पर दृष्टि जाने लगे तो अनदेखा करके श्रेष्ठ मार्ग की ओर बढ़ते रहें, जीवन में खुशहाली का मौसम सदाबहार बना रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *