आज का पंचांग : बल से नहीं, प्रेम से जीतें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष दशमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, कार्तिक |

आज दशमी तिथि 12:50 AM तक उपरांत एकादशी | नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 09:20 PM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी | वैधृति योग 06:25 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग | करण वणिज 12:07 PM तक, बाद विष्टि 12:50 AM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 10:49 AM – 12:11 PM है | आज 03:51 AM तक चन्द्रमा सिंह उपरांत कन्या राशि पर संचार करेगा |

आज का विचार

जो लोग अपने लिए नियम नहीं बनाते, उन्हें फिर दूसरों के बनाये हुए नियमों पर चलना पड़ता है। मंजिल तक पहुँचने के लिए रास्ता मिल जाना ही पर्याप्त नहीं है अपितु एक अनुशासन, समर्पण, प्रतिवद्धता और एक बहुत बड़े जूनून की भी आवश्यकता होती है.

आज का भगवद् चिन्तन
बल से नहीं, प्रेम से जीतें

किसी को बल पूर्वक जीतने की अपेक्षा प्रेम पूर्वक जीतना कई गुना श्रेष्ठ एवं सरल है। किसी को बलपूर्वक हराकर जीतना आसान है, लेकिन उनसे प्रेमपूर्वक हार जाना कई गुना श्रेष्ठ है। जो टूटे को बनाना और रूठे को मनाना जानता है, वही तो बुद्धिमान है। वर्तमान समय में हमारे आपसी संबंधों में मतभेद का प्रमुख कारण ही यह है, कि हम दूसरों को प्रेम की शक्ति से नहीं अपितु बल की शक्ति से जीतना चाहते हैं।

दूसरों को जीतने के लिए बल का प्रयोग नहीं अपितु प्रेम का उपयोग करें। घर-परिवार में भी आज सुनाने को सब तैयार हैं पर सुनने को कोई तैयार ही नहीं है। दूसरों को सुनाने की अपेक्षा स्वयं सुन लेना भी हमारे आपसी संबंधों की मजबूती के लिये अति आवश्यक हो जाता है। अपने को सही साबित करने के लिए पूरे परिवार को ही अशांत बनाकर रख देना कदापि उचित नहीं। घर-परिवार में जितना हम एक दूसरे को समझेंगे उतने हमारे आपसी संबंध भी सुलझेंगे।

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