पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
पौष शुक्ल पक्ष तृतीया, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, पौष |
आज तृतीया तिथि 12:13 PM तक उपरांत चतुर्थी | नक्षत्र श्रवण 07:07 AM तक उपरांत धनिष्ठा | व्याघात योग 04:30 PM तक, उसके बाद हर्षण योग | करण गर 12:13 PM तक, बाद वणिज 12:45 AM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 03:04 PM – 04:23 PM है | आज चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा |
अयोध्या में श्रीराम सबको बड़े संक्षेप में बड़ी गहरी बात समझा रहे थे। सब कुछ सुनने के बाद लोगों ने कहा ‘जननि जनक गुर बंधु हमारे, कृपा निधान प्रान ते प्यारे’। यानी हे कृपानिधान आप हमारे माता, पिता, गुरु, भाई सबकुछ हैं और प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं।
ईश्वर और प्राण का बड़ा संबंध है। वैसे प्राण शब्द के अर्थ कई हैं। हमें यदि ईश्वर को और प्यारा बनाना है, उसकी अनुभूति करना है, तो प्राणों पर काम करना होगा। इसको प्राणायाम कहते हैं। आती-जाती सांस पर होश में रहना ही प्राणायाम है।
सांस तो हम ले ही रहे हैं पर अभी जागरूक नहीं हैं। सांस को देखना ईश्वर को प्राणों से प्यारा बनाना है। क्योंकि जब प्राणायाम करते हैं तो मन नियंत्रण में रहता है। मन को संसार भी कहा गया है। प्राणायाम से मन नियंत्रण में आता है तो हमें समझ आता है कि संसार से भागना नहीं है।
संसार में रहकर ही परमात्मा को प्राप्त करना है। संसार को समझ लेंगे, जो कि मन के नियंत्रण से होगा तो ईश्वर और उसकी अनुभूति बड़ी आसान हो जाएगी। यही बात राम जी से अयोध्यावासियों ने कही थी।
आज का भगवद् चिंतन
गिरकर उठना सीखें
जिसे गिरकर उठना आ गया उसके कदमों को सफलता के शिखर तक पहुँचने से कोई रोक नहीं सकता है। जीवन में सफलता का मूल्यांकन कभी भी इस बात से नहीं होना चाहिए कि हमने जीवन में कितनी ऊँचाई प्राप्त की अपितु इस बात से होना चाहिए कि हम जीवन के कर्तव्य पथ पर कितनी बार गिर कर खड़े हुए हैं। सफल और असफल लोगों में बल और बुद्धि का अंतर नहीं होता अपितु दृढ़ इच्छा शक्ति का ही मूल अंतर होता है।
बल और बुद्धि तो असफल लोगों में भी मिल जाती है, लेकिन उनका संकल्प बड़ा कमजोर होता है। किसी व्यक्ति की सफलता का मूल्यांकन उसकी गिर कर उठने की क्षमता से ही किया जाना चाहिए। जीवन में ऊँचाइयों तक पहुँचना बड़ी बात नहीं पर बार-बार गिरने के बाद भी ऊँचाइयों की उड़ान भरना बहुत बड़ी बात है। जिस दिन किसी के द्वारा दूसरों को दी जाने वाली सलाह पर स्वयं चलना सीख लिया जायेगा, उसी दिन उसकी सफलता भी सुनिश्चित हो जायेगी।