आज का पंचांग : समाज को देना भी सीखें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का भगवद् चिंतन
समाज को देना भी सीखें

जिसके जीवन में सेवा और त्याग है, वही मनुष्य समाज में स्तुत्य एवं मूल्यवान भी है। वृक्ष हों, नदियाँ हों, पवन हों अथवा कोई जीव ही क्यों न हो जो समाज को कुछ देता है, वही देवता है, यही सनातन संस्कृति की विशाल दृष्टि है। ऐसे ही कोई मनुष्य जब समाज को देता है तो देवता के रूप में प्रतिष्ठित हो जाता है। प्रभु कृपा करते हैं तो किसी-किसी जीव के मन में सेवा का भाव जगाकर समाज सेवा का निमित्त बनाते हैं।

सेवा और त्याग का गुण ही समाज में किसी मनुष्य के मूल्य अथवा उपयोगिता का निर्धारण करता है। सेवा और त्याग दैवीय गुण अवश्य हैं, लेकिन सेवा और त्याग का अभिमान ही जीवन का सबसे बड़ा रोग भी है। मनुष्य हों अथवा देवराज इंद्र, कर्तापन का अभिमान जिसके भी भीतर आता है प्रभु द्वारा उसके अभिमान भाव को एक दिन चूर-चूर अवश्य कर दिया जाता है। समाज से लेना ही नहीं, समाज को देना भी सीखिए।

आज का विचार 

.हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में श्रेष्ठ है, इसीलिए हमें दूसरों के अंदर की उत्कृष्टता को हृदय की गहराइयों से नमन करना है। अगर हममें अपने कर्तव्यों को निभाने की शक्ति है, तो ही अधिकार पाने की आशा रखनी है।

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लोगों को सिखाते हुए काम करें, महारत हासिल होगी

एक होता है ज्ञान। शास्त्रों में परम ज्ञान भी बताया गया है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से गीता में परम ज्ञान पर बात की है। परम ज्ञान की सीधी समझ ये है कि अनदेखे के अर्थ को जान लेना। हमारे जीवन में परम ज्ञान की स्थिति कैसे बने? योग्यता और दक्षता जब मिल जाती हैं तो उसे महारत कहते हैं।

हमारे आसपास कई लोग हैं, जो अपने काम में महारत रखते हैं। महारत लंबे समय तक बची रहे इसलिए दूसरों को सिखाते रहें। जब भी कोई काम करें और आपके आसपास अधिक लोग हों, तो काम ऐसे करिए जैसे उन्हें सिखा रहे हैं। जब आप दूसरों को सिखाते हैं तो जितना वो सीखे उससे अधिक आप सीखते हैं। इसे रिवीजन कहते हैं।

अच्छी बात की पुनरावृत्ति हमारे भीतर जितनी बार होगी, हम उतने ही परम ज्ञान को उपलब्ध हो जाएंगे। फिर संसार में काम करते हुए हममें दक्षता आ जाएगी। किसी भी दृश्य और व्यक्ति के पीछे जो अनदेखा है वो दिखने लगेगा। अगर अज्ञात का थोड़ा भी आभास होने लगे तो हम जो भी काम करेंगे पूरी महारत से करेंगे।

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