उनियाल गांव के ग्रामीणों ने सामुदायिक सहभागिता से पनपाया जंगल


चम्बा : जंगलों की अवैध कटाई और पर्यावरण प्रदूषण की खबरें आए दिन देखने और सुनने को मिलती है, लेकिन सकलाना पट्टी का उनियाल गांव एक ऐसा गांव है, जहां के लोगों ने सामुदायिक सहभागिता से बांज, बुरांश, मोरु और अयांर के सैकड़ों पौधे लगाकर जैव विविधता से भरपूर जंगल तैयार कर मिशाल पेश की है। लोग विरासत में जमीन जायदाद और पैसा छोड़कर जाते है, लेकिन उनियाल गांव के ग्रामीणों को ऐसी विरासत मिली है, जो न सिर्फ अनमोल है, बल्कि आने वाली पीढियों के लिए धरोहर भी है।

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सकलाना के उनियाल गाँव के जंगलों का संरक्षण के मामले में औरों के लिए भी मिसाल है। करीब दो दशक पूर्व गांव के बड़े-बुजुर्गों ने बैठक बुलाकर गांव के पास सिलाखा पाखा और डबराण जंगल को हरा-भरा करने का निर्णय लिया। उनकी चिंता थी कि जब जंगल ही नहीं रहेगा तो आने वाली पीढ़ी के लोग चारापती व पानी कहां से लाएंगे। इस दौरान जंगल के संरक्षण का जिम्मा ग्रामीणों ने स्वयं लिया। पूरा गांव शिद्दत से इस नेक काम में जुट गया। पहले यहां पौधे लगाए गए और ग्रामीणों ने बारी-बारी से पौधों की देख रेख व पहरेदारी शुरू की। तब कहीं जाकर सालों बाद सामुदायिक सहभागिता से बांज, मोरू, बुरांश और अयांर सहित कई पेड़ों का ऐसा घना जंगल जंगल तैयार हो पाया। गर्मियों के दौरान यदि कभी जंगल में आग लग जाती है तो गांव वाले सारे काम छोड़कर उसे बुझाने दौड़ जाते हैं। पिछले दो दशक से हरियाली लौटाने के इस प्रेरणादायी काम का नतीजा यह हुआ कि जंगल में चारों तरफ हरियाली से आच्छादित हो गया। हजारों पेड़ जंगल में सौंदर्य की छटा बिखेर रहे हैं। पानी के स्रोत फिर से जी उठे हैं। वे सदानीरा हो गए हैं।

वन पंचायत सरपंच

अनुसूया प्रसाद उनियाल


वन पंचायत सरपंच अनुसूया प्रसाद उनियाल का कहना हैजंगल का संरक्षण सहभागिता से हो रहा है, इसलिए वह लगातार विस्तार पा रहा है। हम सभी को जंगल की अहमियत समझनी होगी। जंगल सिर्फ वन विभाग का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है।