धनतेरस पर यमराज की पूजा क्यों होती है? यम दीपदान की कथा क्या है

धनतेरस पर यम दीपदान किया जाता है, जो परिवार के लोगों के कल्याण के लिए करना बेहद आवश्यक होता है। लेकिन कई लोगों को नहीं पता होता है कि यह दीपदान क्यों किया जाता है, इसकी संख्या कितनी होनी चाहिए, दीपक किस दिशा में जलाना चाहिए और उस दौरान किन मंत्रों का जाप शुभ है। तो, चलिए जानते हैं…

पंडित हर्षमणि बहुगुणा

आज धनतेरस है। आज के दिन खरीददारी करने के साथ-साथ दीपदान भी किया जाता है। धनतेरस पर दीपदान को यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं टिकती और लक्ष्मी-कुबेर की कृपा से धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी धन तेरस कहलाती है। इस दिन चांदी का पात्र खरीदना अत्यन्त शुभ माना जाता है, परन्तु वस्तुत: यह यमराज से सम्बन्ध रखने वाला व्रत है, अतः इस दिन सायं काल में घर के बाहर मुख्य दरवाजे पर एक पात्र में अनाज रखकर उसके उपर यमराज के निमित्त दक्षिणाभिमुख दीप प्रज्ज्वलित करना चाहिए यह प्रार्थना भी करनी चाहिए।

मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीयतामिति ।।

आज के दिन यमुना स्नान व व्रत का भी माहात्म्य है। क्या है कारण यह जानते हैं- एक बार यमराज ने अपने दूतों से पूछा तुम मृत्यु लोक से प्राणियों का प्राण हरण कर लाते हो क्या तुम्हें दया नहीं आती? इस पर दूतों का कथन था प्रभो! आती है और उस समय अधिक जब किसी युवा को असमय लाना पड़ता है वहां का करुण क्रंदन हृदय विदारक होता है, महाराज एक बार एक राजकुमार के प्राण उसके विवाह के चौथे दिन बाद लाने पड़े, उस समय वहां का दृश्य देखकर हमें अपने इस कृत्य पर बहुत घृणा हुई, अतः प्रभो! ऐसी युक्ति बताईए कि किसी की असामयिक मृत्यु न हो।

इस पर यमराज ने कहा कि जो धन तेरस के पर्व पर मेरे निमित्त दक्षिणाभिमुख दीप दान करेगा उसकी असामयिक मृत्यु नहीं होगी। अतः आज के दिन सन्ध्या के समय दीप दान अवश्य करना चाहिए। आज धन्वंतरि का प्राकट्योत्सव भी है, आज धन्वंतरि जयंती मनाई जाती है, धन्वंतरि की प्रतिमा की पूजा कर प्रसाद वितरण कर लोगों के दीर्घायु व आरोग्यता की मंगल कामना की जाती है, इस तरह भगवान ने प्राणियों को रोग मुक्त करने के लिए भव भेषजावतार के रूप में प्रकट हुए। भारतीय संस्कृति उत्कृष्ट है किन्तु हम निहित स्वार्थों के कारण उसे दूषित कर देते हैं और अपनी अनन्य विभूषित संस्कृति को बढ़ावा न देकर ‘घर का जोगी जोगटा आन बान का सिद्ध’ की कहावत को चरितार्थ करते हैं। कहीं न कहीं अपनी संस्कृति व अपने लोगों से इर्ष्या के कारण ऐसा तो नहीं कर रहे हैं यह विचारणीय है। यह प्रार्थना भी करता हूं कि- महाराज कुबेर आपके भण्डार को हमेशा परिपूर्ण रखें, अकाल मृत्यु से यमराज जी मुक्त करें और आपको आजीवन धन्वंतरि जी स्वस्थ बनाए रखें, आप सभी की सुख, समृद्धि की कामना भगवान से करता हूँ, आप नित नई खरीददारी करें, आप चल, अचल सम्पत्ति से परिपूर्ण हो और सभी लोगों का जीवनस्तर सुधरे, सभी को मूलभूत सुविधाएं मिले, कोई भी रोटी, कपड़ा, मकान से वंचित न रहे, हमारे देश में खुशहाली आये, और हमारा भारतवर्ष पुनः सोने की चिड़िया बने, आज दोपहर 12:20 तक द्वादशी तिथि तत्पश्चात त्रियोदशी तिथि शुरू होगी, सायं काल दीपदान अवश्य कीजिए। मंगलमय जीवन की शुभकामना करता हूं। शुभ दीपोत्सव।

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