आज का पंचांग : हर हाल में गणेश जी का निर्माण मिट्टी से किया जाए

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

कभी-कभी तो भगवान की कथा सुनकर आश्चर्य होता है। शिव जी ने पार्वती जी से कहा था- जब रघुनाथ कीन्हि रन क्रीड़ा, समुझत चरित होति मोहि ब्रीड़ा। जब रघुनाथ ने ऐसी रण-लीला की, जिसका स्मरण करने से मुझे लज्जा होती है।

वो लीला थी राम जी ने युद्ध में मेघनाद के हाथों अपने को बंधवा लिया, तब नारद जी ने गरुड़ को भेजा था। ये दृश्य जब शिव जी को याद आता है तो उनको बड़ा आश्चर्य होता है। अब जैसे शिव पुराण में लिखा है कि कल्पभेद से गणेश जी की कई कथाएं हैं। यह तो तय है कि प्लास्टर ऑफ पेरिस जैसी नुकसानकारी सामग्री उपयोग नहीं की जाए।

इसलिए हर हाल में गणेश जी का निर्माण मिट्टी से करें। यह शास्त्रसम्मत हो गया। इसे भगवान की विस्मयकारी लीला मान स्वीकारें। धरती मां का मैल मिट्टी है।

आज का भगवद् चिन्तन
जैसा संग, वैसा रंग

संगति का मानव जीवन पर जाने-अनजाने बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। बुरी संगति हमारे व्यवहार को भी अशुद्ध कर देती है। हम कितना भी भजन कर लें, ध्यान कर लें लेकिन हमारा संग गलत है तो हमारे द्वारा पढ़े गये ग्रंथ , हमारे द्वारा अर्जित ज्ञान और हमारे द्वारा सुना हुआ सत्संग कुछ भी आचरण में नहीं उतर पायेगा। साधना के जगत में संग का अति विशेष महत्व है। व्यवहार की शुद्धि के लिए महापुरुषों का संग अवश्य होना चाहिए।

आपको धनवान होना है तो धनी लोगों का संग करें, राजनीति में जाना है तो राजनीतिक लोगों का संग करें पर भक्त बनना है तो संतों, महापुरुषों और वैष्णवों का संग अवश्य करना पड़ेगा। दुर्जन की एक क्षण की संगति भी बड़ी घातक होती है। वृत्ति और प्रवृत्ति तो संत संगति से ही सुधरती है। संग का ही प्रभाव था कि लूटपाट करने वाला, रामायण लिखने वाले वाल्मीकि जी बन गए। थोड़े से भगवान बुद्ध के संग ने अंगुलिमाल जैसे डाकू का भी हृदय परिवर्तन कर दिया।