जैन दिवाकर कमल तीर्थ में संतों, विशेषज्ञों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की बैठक; पंचगव्य, सहकारिता, महिला-युवा नेतृत्व और पर्यावरण पर बनी कार्ययोजना
मैसूर। जैन दिवाकर कमल तीर्थ, मैसूर में गाय और गोधन को भारतीय अर्थव्यवस्था, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा रोजगार से जोड़ने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा आयोजित की गई। राष्ट्रीय संत एवं जैन मुनि श्री कमल मुनि कमलेश की अध्यक्षता में हुई बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जैन समाज के बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।
बैठक में गाय के सम्मान और संरक्षण के साथ-साथ गोधन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने, गोचर भूमि के संरक्षण, पंचगव्य आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने तथा महिला और युवा शक्ति को इस अभियान से जोड़ने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
इस दौरान पंचगव्य विद्यापीठ के डॉ निरंजन वर्मा,
पूर्व आईएएस एवं पंचगव्य विद्यापीठ के उपकुलपति भाई कमलानंद (डॉ. कमल टावरी), सेवक MSCS Cooperative Ltd के अध्यक्ष डॉ. सुभाष नलांगे, बिजनेस कंसल्टेंट विमल बत्रा तथा मैसूर के जैन समाज से जुड़े विभिन्न बौद्धिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाई कमलानंद ने कहा कि इस बैठक से
संतों से समृद्धि गायों से वृद्धि और निराशा छोड़ो जड़ से जुडो और पत्रकार प्रेरित पर्यावरणीय परिवर्तन अभियान को बहुत गति मिलेगी और स्वावलंबन गतिशील होंगे.
जिम्मेदारियां तय, अभियान को मिलेगी गति
बैठक में विभिन्न कार्यों के लिए जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गईं। बिजनेस कंसल्टेंट विमल बत्रा को निर्यात प्रेरित उद्योग के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई। डॉ. सुभाष नलांगे को सहकारिता से समृद्धि अभियान के साथ गोचर भूमि, गौशाला, गोधन आधारित उद्योग, महिला एवं युवा, अनुभवी प्रतिभाओं, ब्लॉक एवं ग्राम उद्योग, एमएसएमई तथा नर्सरी से जुड़े कार्यों का दायित्व सौंपा गया।
नित्यानंद तिवारी को इवेंट, जनसंपर्क एवं मीडिया की जिम्मेदारी दी गई। डॉ. कमल टावरी को संपूर्ण समन्वय के साथ जैन संघ के महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं गुजरात की आशा जी को महिला नेतृत्व के समन्वय का दायित्व दिया गया।
गोधन से रोजगार और ग्राम अर्थव्यवस्था पर जोर
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गाय को केवल धार्मिक आस्था के विषय तक सीमित न रखते हुए उससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान, जैविक कृषि, पंचगव्य उत्पाद, ग्रामीण उद्योग और रोजगार की संभावनाओं को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए।
वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में स्थानीय संसाधनों और परंपरागत ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। इसके लिए गौशालाओं को केवल आश्रय स्थल के रूप में नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, अनुसंधान, जैविक कृषि और स्थानीय रोजगार के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
भारतीय संस्कृति के वैश्विक विस्तार का आह्वान
अपने संबोधन में राष्ट्रीय संत श्री कमल मुनि कमलेश ने भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, युवा शक्ति, महिला नेतृत्व और समग्र विकास के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया।
उन्होंने कहा कि विकास की अवधारणा ऐसी होनी चाहिए जिसमें प्रकृति, समाज और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बना रहे। युवाओं और महिलाओं को नेतृत्व की मुख्यधारा में लाकर सामाजिक परिवर्तन की गति को तेज किया जा सकता है।
28 बिंदुओं पर बनी कार्ययोजना
बैठक में व्यापक कार्ययोजना पर सहमति बनी। इसमें वॉलेंटियर एक्शन सेल के गठन, अतिरिक्त एक्शन एवं पीपुल्स प्लानिंग कमिशन की दिशा में कार्य, दिवाकर मंच को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तार देने और पंचगव्य विद्यापीठ के साथ मिलकर कार्य करने का निर्णय शामिल है।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करने, उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों का अभिनंदन करने, खाली भूमि का गोधन विकास के लिए उपयोग करने तथा संतों को गोसेवा से जोड़ने पर भी सहमति बनी।
इसके अलावा परंपरागत उद्योगों से जुड़े समुदायों की विशेषताओं को प्रोत्साहित करने, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ साझेदारी, अधूरे सामाजिक सपनों के लिए समग्र कार्ययोजना, दिवाकर मंच के सेवकों को गव्यसिद्ध प्रशिक्षण, गोधन आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन और आवश्यक सहयोग देने की योजना बनाई गई।
बैठक में जेलों में गौशाला स्थापना, 18 राज्यों में स्थापित दिवाकर मंच तथा 40 केंद्रों पर पंचगव्य विद्यापीठ के साथ समन्वय, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के क्षेत्र में वैकल्पिक मॉडल विकसित करने, वक्तृत्व एवं नेतृत्व कला का प्रशिक्षण और समसामयिक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने पर भी चर्चा हुई।
एनआरआई और सेवानिवृत्त विशेषज्ञों की प्रतिभा का होगा उपयोग
कार्ययोजना में विदेशों में रहने वाले भारतीयों के अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग ग्राम विकास के लिए करने तथा सेवानिवृत्त अनुभवी प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें सामाजिक कार्यों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
कमजोर क्षेत्रों का चयन कर वहां केंद्रित रूप से काम करने, आत्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा एवं अहिंसा के मूल्यों को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति अभियान चलाने तथा महापुरुषों के विचारों को आधुनिक माध्यमों से समाज तक पहुंचाने की योजना भी सामने रखी गई।
बैठक में INA, Muni International और DIG Chamoli जैसी संस्थाओं एवं पहलों को केस स्टडी के रूप में समझने और उनसे सीख लेकर आगे की कार्ययोजना विकसित करने का सुझाव दिया गया।
साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे दोनों संस्थान
बैठक के अंत में दिवाकर मंच और पंचगव्य विद्यापीठ ने संयुक्त रूप से कार्य करने पर सहमति व्यक्त की। विभिन्न राज्यों से आए अनुभवी प्रतिभागियों ने उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों को निभाने तथा अभियान को जमीन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
बैठक का मुख्य संदेश यही रहा कि गोधन संरक्षण को केवल भावनात्मक विषय न बनाकर उसे ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार, सहकारिता, महिला सशक्तीकरण और युवा नेतृत्व से जोड़ा जाए। इसके लिए स्थानीय संसाधनों, आधुनिक प्रबंधन और अनुभवी प्रतिभाओं के समन्वय से एक व्यापक सामाजिक मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है।





