आज का पंचांग : शिव तत्व विचार

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आषाढ़ कृष्ण पक्ष तृतीया, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़ | आज है जाया पार्वती व्रत समाप्त

आज तृतीया तिथि 01:02 AM तक उपरांत चतुर्थी | नक्षत्र श्रवण 06:53 AM तक उपरांत धनिष्ठा | प्रीति योग 06:00 PM तक, उसके बाद आयुष्मान योग | करण वणिज 01:27 PM तक, बाद विष्टि 01:03 AM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 05:32 PM – 07:11 PM है | आज 06:53 PM तक चन्द्रमा मकर उपरांत कुंभ राशि पर संचार करेगा

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – श्रावण
  4. अमांत – आषाढ़

तिथि

  1. कृष्ण पक्ष तृतीया   – Jul 13 01:46 AM – Jul 14 01:02 AM
  2. कृष्ण पक्ष चतुर्थी   – Jul 14 01:02 AM – Jul 14 11:59 PM

नक्षत्र

  1. श्रवण – Jul 12 06:36 AM – Jul 13 06:53 AM
  2. धनिष्ठा – Jul 13 06:53 AM – Jul 14 06:49 AM

करण

  1. वणिज – Jul 13 01:46 AM – Jul 13 01:27 PM
  2. विष्टि – Jul 13 01:27 PM – Jul 14 01:03 AM
  3. बव – Jul 14 01:03 AM – Jul 14 12:33 PM

योग

  1. प्रीति – Jul 12 07:31 PM – Jul 13 06:00 PM
  2. आयुष्मान – Jul 13 06:00 PM – Jul 14 04:13 PM

वार

  1. रविवार

त्यौहार और व्रत

  1. जाया पार्वती व्रत समाप्त

सूर्य और चंद्रमा का समय

  1. सूर्योदय – 5:53 AM
  2. सूर्यास्त – 7:11 PM
  3. चन्द्रोदय – Jul 13 9:20 PM
  4. चन्द्रास्त – Jul 14 8:54 AM

अशुभ काल

  1. राहू – 4:32 PM – 6:11 PM
  2. यम गण्ड – 12:32 PM – 2:12 PM
  3. कुलिक – 3:52 PM – 5:32 PM
  4. दुर्मुहूर्त – 05:25 PM – 06:18 PM
  5. वर्ज्यम् – 10:52 AM – 12:28 PM

शुभ काल

  1. अभिजीत मुहूर्त – 12:06 PM – 12:59 PM
  2. अमृत काल – 08:25 PM – 10:00 PM
  3. ब्रह्म मुहूर्त – 04:17 AM – 05:05 AM

आनन्दादि योग

  1. गद Upto – 06:53 AM
  2. मातंग

सूर्या राशि

  1. सूर्य मिथुन राशि पर है

चंद्र राशि

  1. चन्द्रमा जुलाई 13, 06:53 PM तक मकर राशि उपरांत कुंभ राशि पर संचार करेगा

चन्द्र मास

  1. अमांत – आषाढ़
  2. पूर्णिमांत – श्रावण
  3. शक संवत (राष्ट्रीय कलैण्डर) – आषाढ़ 22, 1947
  4. वैदिक ऋतु – ग्रीष्म
  5. द्रिक ऋतु – वर्षा

आज का चिंतन

सही समझ के साथ संभलो आत्मा की आवाज मानलो, ना तो बस में है जिंदगी, ना है काबू मौत पर, लेकिन हम फिर भी भगवान बने फिरते हैं ना तो बस में है मन, ना है काबु सांस पर, लेकिन हम फिर भी शक्तिमान बने फिरते हैं।

आज का भगवद् चिन्तन
शिव तत्व विचार

“शिवत्व” अर्थात लोक मंगल की वह विराट भावना जिसमें स्वयं अनेक कष्टों को सहकर भी दूसरों के कष्टों को मिटाने का हर सम्भव प्रयास किया जाता है। स्वयं खुले आसमान के नीचे जीवन यापन कर रावण को सोने की लंका देने वाले भगवान शिव से श्रेष्ठ इसका कोई उदाहरण नहीं हो सकता है। भगवान शिव भले ही स्वयं फकीरी में रहे पर बाणासुर और रावण जैसे अनेक भक्तों को उन्होंने अनंत ऐश्वर्य सुख भी प्रदान किये।

अपने भक्तों की प्रत्येक उस इच्छा की पूर्ति भगवान महादेव ने की जो भक्तों द्वारा उनसे याचना की गई। जिसके अंदर लोकमंगल का भाव न हो, जिसकी प्रवृत्ति में परोपकार न हो और जिसका मन किसी की पीड़ा को देखकर व्यथित न होता हो वह व्यक्ति शिव-शिव कहने मात्र से कभी भी शिव भक्त नहीं हो सकता। जो प्रत्येक स्थिति में भक्तों का कल्याण करे वह “शिव” और जो कल्याण की भावना रखे वही “शिव भक्त” है।

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