आज का पंचांग : सावन में बारिश की एक-एक बूंद बचाने का लें निर्णय

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

श्रावण कृष्ण पक्ष सप्तमी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़ | आज है कालाष्टमी

सावन में पानी की एक-एक बूंद बचाने का लें निर्णय

शिव जी को जल बहुत पसंद है। विष्णु जी का तो नाम नारायण ही जल के कारण पड़ा, क्योंकि संस्कृत में जल को नार भी कहते हैं। हम सावन माह में प्रवेश कर गए हैं। खूब कांवड़ यात्राएं निकल रही हैं, खूब जलाभिषेक होंगे। शिवजी के जलाभिषेक के लिए जल ले जाना कांवड़ यात्रा का प्रमुख लक्ष्य है। लेकिन अब पानी को बचाने की कांवड़ यात्राएं वर्ष भर निकलनी चाहिए।

भूजल का भारत ने बहुत दोहन किया है। एक बात और चिंता की है। दूषित जल को पीने से भारत में कई लोग साल भर में मर जाते हैं।

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पानी का एकमात्र स्त्रोत है वर्षा। हमें इस पानी की एक-एक बूंद सहेजना होगा। यह ग्रामीण क्षेत्रों में यह काम तालाब के माध्यम से हो सकता है और शहरी क्षेत्रों में वाटर हार्वेस्टिंग ( जल संचयन) के माध्यम से। वाटर हारवेस्टिंग के माध्यम से पानी को एकत्र कर भूजल को ऊपर लाया जा सकता है। इसके माध्यम से कुओं व नलकूप को पुनजीर्वित किया जा सकता है। हमारे यहां पुरानी कहावत है बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। यानी इस सबसे धरती का पेट भरेगा तो वह हमें पानी देती रहेगी।

यानी समन्वित प्रयास से ही हम पानी जैसे बहुमूल्य संसाधन का संरक्षण व संवर्धन कर सकते हैं। हमें पानी की किफायत बरतनी चाहिए और नदियों और पारंपरिक स्रोतों को बचाने के लिए आगे आना चाहिए। लेकिन क्या हम इस दिशा में सचमुच कुछ पहल करने के लिए तैयार हैं? जल की एक एक बूंद कीमती है। इसे बचाने का प्रयास करना आवश्यक है। 

और इस सावन के महीने में हमें पूरी दुनिया का विचार करना चाहिए कि आधी आबादी पानी की कमी वाली स्थिति में आ गई है। बहुत बड़ी क्रांति न करें, पर सावन के इस माह में हम यह निर्णय करें कि बारिश के पानी की एक-एक बूंद बचाएंगे। जल के मामले में मानसून अस्थिर हो गया है, लेकिन जल बचाने में हम स्पष्ट और दृढ़ संकल्प रहें, तभी सावन का आनंद आएगा।

आज सप्तमी तिथि 07:09 PM तक उपरांत अष्टमी | नक्षत्र रेवती 03:39 AM तक उपरांत अश्विनी | अतिगण्ड योग 09:28 AM तक, उसके बाद सुकर्मा योग | करण विष्टि 08:07 AM तक, बाद बव 07:09 PM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 02:12 PM – 03:52 PM है | आज 03:39 AM तक चन्द्रमा मीन उपरांत मेष राशि पर संचार करेगा.

  1. विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – श्रावण
  4. अमांत – आषाढ़

तिथि

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  1. कृष्ण पक्ष सप्तमी   – Jul 16 09:02 PM – Jul 17 07:09 PM
  2. कृष्ण पक्ष अष्टमी   – Jul 17 07:09 PM – Jul 18 05:02 PM

नक्षत्र

  1. रेवती – Jul 17 04:50 AM – Jul 18 03:39 AM
  2. अश्विनी – Jul 18 03:39 AM – Jul 19 02:14 AM