देश में उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 को लेकर हलचल तेज है। निवर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद ये पद खाली हो गया है और चुनाव आयोग ने नया चुनाव 9 सितंबर 2025 को कराने का ऐलान किया है। लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों की संख्या को देखते हुए स्पष्ट है कि एनडीए का कैंडिडेट ही जीतने की स्थिति में है। इसलिए एनडीए की ओर से किसे कैंडिडेट बनाया जाएगा। इस पर कयासों का दौर चल रहा है। राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश का नाम भी रेस में बताया जा रहा है। इसका कारण बिहार का विधानसभा चुनाव भी है। उनके बिहार कनेक्शन का फायदा भाजपा और जेडीयू उठाना चाहेंगे। इसके अलावा दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के एलजी वीके सक्सेना और मनोज सिन्हा का नाम चर्चा में है। साथ ही अब एक और नाम चर्चा में है। यह नाम है, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का।
नई दिल्ली : जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। तारीखों की घोषणा के साथ ही अब उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा हो जाएगी। इस बीच उपराष्ट्रपति पद के संभावित नामों को लेकर कयास लगने शुरू हो गए हैं।
हरिवंश सिंह
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह का नाम उपराष्ट्रपति की रेस सबसे आगे बताया जा रहा है। वो जनता दल (यूनाइटेड) के राज्यसभा सांसद हैं और 2020 से इस पद पर हैं। अभी वो अस्थायी रूप से राज्यसभा के सभापति की भूमिका निभा रहे हैं। वह सरकार के काफ़ी करीबी माने जाते हैं।
राजनीति में इस तरह की एंट्री
साल 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने हरिवंश को पीएमओ से जुड़ने का प्रस्ताव दिया। तब वह अतिरिक्त सूचना सलाहकार (संयुक्त सचिव) के रूप में पीएमओ से जुड़े। चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री का पद छोड़ते ही हरिवंश इस्तीफा देकर फिर पत्रकारिता में लौट गए। इसके बाद अप्रैल 2014 में जनता दल (यू) ने इन्हें बिहार से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित किया। इसके बाद 9 अगस्त 2018 को राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए पहली बार निर्वाचित हुए। सितंबर 2020 को राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए दूसरी बार निर्वाचित हुए।
दिग्गज पत्रकार भी रहे हैं हरिवंश
हरिवंश ने बीएचयू से पत्रकारिता डिप्लोमा किया था। हरिवंश ने सक्रिय पत्रकारिता की शुरुआत टाइम्स ऑफ इंडिया समूह में ट्रेनी जर्नलिस्ट के रूप में की। इसके बाद वह हिंदी पत्रिका धर्मयुग में उप-संपादक के रूप में 1977-1981 तक रहे। यहां उन्हें धर्मवीर भारती से लेकर गणेश मंत्री जैसे पत्रकार का सान्निध्य मिला। इसके बाद हरिवंश आनंद बाजार पत्रिका समूह की हिंदी पत्रिका ‘रविवार’ में सहायक संपादक बने। यहां उन्होंने बिहार, झारखंड (तब अविभाजित बिहार का ही हिस्सा) समेत देश के कई इलाकों में, ग्रासरूट रिपोर्टिंग की। इसके बाद हरिवंश की पत्रकारिता के कैरियर में अहम पड़ाव बना प्रभात खबर बना। 1989 में रांची में प्रधान संपादक बने। इसके बाद वह नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, फस्टपोस्ट, संडे (अंग्रेजी) जैसे संस्थानों में काम किया।
वीके सक्सेना
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना भी इस पद की दौड़ में हैं। दिल्ली सरकार और एलजी के टकराव के कारण वो सुर्खियों में रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें जल्द ही “बड़ी भूमिका” में भेजा जा सकता है।
आचार्य देवव्रत
वर्तमान में गुजरात के राज्यपाल और इससे पहले हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे। आर्य समाज से जुड़े और कुरुक्षेत्र के एक गुरुकुल के प्राचार्य रह चुके हैं। हिंदी में स्नातकोत्तर, और 30 से अधिक वर्षों का शिक्षण व प्रशासनिक अनुभव रखते हैं।