आज का पंचांग : ऐसा साहित्य पढ़ें, जो हम पर सकारात्मक प्रभाव डाले

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

मनुष्य जो देखता-सुनता है, वो दृश्य-शब्द जब वो भीतर महसूस करता है, तो उसके मिरर न्यूरोन्स पर वो अंकित हो जाते हैं। जब हम कोई अच्छी चीज देखते हैं, अच्छी बात सुनते हैं, तो आनंद में डूब जाते हैं, निर्भय हो जाते हैं, आत्मविश्वास से भर जाते हैं। और जब भी कोई अप्रिय दृश्य देखते या सुनते हैं तो उदास, चिड़चिड़े हो जाते हैं, अवसाद में डूब जाते हैं।

शंकर जी ने पार्वती जी को जब रामकथा सुनाई तो समापन पर पार्वती जी ने शंकर जी से कहा- धन्य धन्य मैं धन्य पुरारी। सुनेउँ राम गुन भव भय हारी। हे त्रिपुरारि, मैं धन्य हूं, जो मैंने जन्म-मृत्यु के भय को हरण करने वाले श्रीराम के गुण-चरित्र सुने।

पार्वती बिलकुल सही कह रही हैं कि मैं धन्य हो गई, भयमुक्त हो गई। धन्य होने का अर्थ है इतना आनंद आया कि इसके बाद कुछ करने, सोचने के लिए नहीं रहा। और भयमुक्त तो होना ही चाहिए। इसलिए ऐसा साहित्य पढ़ें, ऐसी बातें देखें-सुनें, जो हमारे भीतर पॉजिटिव प्रभाव रखें। रामकथा उन्हीं में से एक है।

आज 05 अगस्त, 2025 मंगलवार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि है | श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, श्रावण | आज है श्रावण पुत्रदा एकादशी|

आज एकादशी तिथि 01:12 PM तक उपरांत द्वादशी | नक्षत्र ज्येष्ठा 11:22 AM तक उपरांत मूल | इन्द्र योग 07:24 AM तक, उसके बाद वैधृति योग | करण विष्टि 01:12 PM तक, बाद बव 01:45 AM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 03:47 PM – 05:25 PM है | आज 11:22 AM तक चन्द्रमा वृश्चिक उपरांत धनु राशि पर संचार करेगा

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – श्रावण
  4. अमांत – श्रावण

तिथि

  1. शुक्ल पक्ष एकादशी   – Aug 04 11:42 AM – Aug 05 01:12 PM
  2. शुक्ल पक्ष द्वादशी   – Aug 05 01:12 PM – Aug 06 02:08 PM

नक्षत्र

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  1. ज्येष्ठा – Aug 04 09:12 AM – Aug 05 11:22 AM
  2. मूल – Aug 05 11:22 AM – Aug 06 12:59 PM

पुत्रदा एकादशी आज


एकादशी सनातन धर्म का प्रमुख व्रत है, जिसे हर महीने की ग्यारहवीं तिथि पर रखा जाता है। इस दिन सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। इसके प्रभाव से साधक की सभी इच्छाएं पूरी और जीवन में सुख-समृद्धि वास करती हैं। यह तिथि महिलाओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। दरअसल, एकादशी पर तुलसी पूजन का विधान है। इसके प्रभाव से वैवाहिक जीवन सुखमय और रिश्ते मजबूत होते हैं। इस दौरान पुत्रदा एकादशी पर तुलसी पूजन करना और भी लाभकारी माना जाता है। बता दें, तुलसी को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है, इसलिए इस दिन उनके पास दीप जलाने और आरती करने से संतान सुख के योग बनते हैं। यही नहीं संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी महिलाओं को मिलता है। इस बार आज 5 अगस्त को पुत्रदा एकादशी है। इस तिथि पर ज्येष्ठा नक्षत्र और ऐन्द्र योग बना रहेगा।

पुत्रदा एकादशी शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 04 अगस्त को सुबह 11 बजकर 41 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 05 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 12 मिनट पर होगा। ऐसे में पुत्रदा एकादशी व्रत आज 05 अगस्त को किया जाएगा और व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाएगा।

पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का समय

पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण 06 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन व्रत का पारण करने का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 15 मिनट से 08 बजकर 21 मिनट तक है।

पुत्रदा एकादशी व्रत पारण की विधि

इस दिन स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद मंदिर की सफाई करने के बाद पूजा-अर्चना करें। देसी घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आरती करें। मंत्रों का जप और विष्णु चालीसा का पाठ करें। इसके बाद सात्विक चीजों का भोग लगाएं। गरीब लोगों या मंदिर में दान करें।

पुत्रदा एकादशी शुभ योग

सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इनमें इंद्र योग का संयोग सुबह 07 बजकर 25 मिनट तक है। वहीं, रवि योग का संयोग सुबह 05 बजकर 18 मिनट से सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक है। इसके साथ ही शिववास योग का संयोग दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक की हर एक मनोकामना पूरी होगी।

पद्म पुराण के अनुसार इस व्रत का महत्व

पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार भूतपूर्व काल में माहिष्मती नगरी के राजा महीजित के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने ऋषि-मुनियों से परामर्श लिया और अंततः महर्षि लोमश ने उन्हें श्रावण शुक्ल एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने विधिपूर्वक इस व्रत का पालन किया, जिससे उन्हें शीघ्र ही संतान की प्राप्ति हुई। इस प्रसंग के आधार पर यह एकादशी ‘पुत्रदा’के नाम से विख्यात हुई। इस दिन का व्रत सभी पापों का नाश करता है और संतान सुख के साथ-साथ समस्त इच्छाओं की पूर्ति करता है।

पूजा विधि

पवित्रा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। उन्हें पीले वस्त्र पहनाकर पीले पुष्प, तुलसीदल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। दिनभर निराहार या फलाहार व्रत रखें और व्रत के नियमों का पालन करें। रात्रि में भगवान विष्णु का कीर्तन, भजन और जागरण करना अत्यंत पुण्यदायक होता है।

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व्रत के लाभ और किन्हें यह व्रत करना चाहिए

यह व्रत उन दंपतियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो संतान सुख की इच्छा रखते हैं। या फिर संतान की किसी भी समस्या से जूझ रहे हों। पद्म पुराण में कहा गया है कि जो श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करता है उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह व्रत विद्यार्थियों, गृहस्थों और मोक्ष की अभिलाषा रखने वालों के लिए भी अत्यंत कल्याणकारी है।