पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष अष्टमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद |आज है दुर्गाष्टमी व्रत, महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ, दूर्वा अष्टमी and राधाष्टमी|
आज अष्टमी तिथि 12:58 AM तक उपरांत नवमी | नक्षत्र अनुराधा 05:27 PM तक उपरांत ज्येष्ठा | वैधृति योग 03:58 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग | करण विष्टि 11:55 AM तक, बाद बव 12:58 AM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 05:08 PM – 06:41 PM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा |
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इन दिन राधा रानी का जन्म हुआ था, जिन्हें श्रीकृष्ण की प्रेमिका और उनकी आराध्या संगिनी माना जाता है। इस वर्ष राधा अष्टमी का पावन पर्व आज 31 अगस्त, रविवार को मनाया जा रहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन राधा जी की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम की वृद्धि होती है।
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – भाद्रपद
- अमांत – भाद्रपद
तिथि
- शुक्ल पक्ष अष्टमी – Aug 30 10:46 PM – Sep 01 12:58 AM
- शुक्ल पक्ष नवमी – Sep 01 12:58 AM – Sep 02 02:43 AM
नक्षत्र
- अनुराधा – Aug 30 02:37 PM – Aug 31 05:27 PM
- ज्येष्ठा – Aug 31 05:27 PM – Sep 01 07:55 PM
आज का भगवद् चिन्तन
श्रीराधा अष्टमी की मंगल बधाई
श्रीराधा एवं श्रीकृष्ण दो नहीं अपितु एक दूसरे से सदैव अभिन्न हैं। शास्त्रों एवं तत्वज्ञानी महापुरुषों का मत है, कि उन परम ब्रह्म श्रीकृष्ण की चेतना शक्ति और आह्लादिनी शक्ति का नाम ही श्रीराधा है। राधा-कृष्ण को जिसने भी पाया एक दूसरे से अभिन्न एक रूप ही पाया। अर्थात् राधा को पाया तो कृष्ण को भी पाया और कृष्ण को पाया तो राधा को भी पाया।
उन लीला पुरूषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण का माधुर्य, उनकी चितवन, उनका श्रृंगार, उनका हास-विलास, उनकी चपलता, उनकी निश्छलता, उनका संगीत, उनका नृत्य, उनका शील, उनकी लज्जा, उनकी करुणा, उन कृष्ण में समाहित इन सब उच्चतम गोपी भावों का नाम ही तो राधा है।
इन सभी भावों के बिना उन मधुराधिपति श्रीकृष्ण का कोई अस्तित्व भी नहीं। इसीलिए भक्तों ने राधा के बिना श्याम आधा अथवा बिन राधा, श्याम आधा को गाया है। लीला करने के उद्देश्य से ही वो लीलाधर एक से दो रूप हो जाते हैं। बाहरी चक्षुओं से वो दो ही नजर आते हैं परन्तु तत्वतः राधा-कृष्ण एक ही रूप हैं।
श्रीराधा अष्टमी का पावन पर्व आप सभी के लिए शुभ एवं मंगलमय हो।