आज एकादशी, संक्रांति और पुष्य नक्षत्र के सुयोग में आज मनेगी विश्वकर्मा पूजा

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आश्विन कृष्ण पक्ष एकादशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद |आज है विश्वकर्मा जयंती, कन्या संक्रांति और इंदिरा एकादशी|

आज एकादशी तिथि 11:39 PM तक उपरांत द्वादशी | नक्षत्र पुनर्वसु 06:26 AM तक उपरांत पुष्य | परिघ योग 10:54 PM तक, उसके बाद शिव योग | करण बव 11:57 AM तक, बाद बालव 11:40 PM तक, बाद कौलव | आज राहु काल का समय 12:21 PM – 01:52 PM है | आज चन्द्रमा कर्क राशि पर संचार करेगा |

आज आश्विन कृष्णपक्ष एकादशी के साथ संक्रांति व पुष्य नक्षत्र के सुयोग में देवशिल्पी व कामगारों के आराध्य भगवान विश्वकर्मा की पूजा होगी।

कल-कारखाने, गैराज, कंपनी, हार्डवेयर, मोटर वाहन, साइकिल व मशीनरी से जुड़े सभी स्थलों में उनकी पूजा होगी। देवशिल्पी विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में वृद्धि के साथ माता लक्ष्मी के आगमन के आसार में भी वृद्धि होती है। आज विश्वकर्मा पूजा के साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इंदिरा एकादशी, कन्या संक्रांति, पुष्य नक्षत्र, शिववास, परिघ योग व शिव योग का उत्तम संयोग भी बन रहा है। सुबह 9:24 बजे तक पुनर्वसु फिर पुष्य नक्षत्र लग जाएगा। ऐसे उत्तम संयोग में विश्वकर्मा भगवान की पूजा करने से रोजी-रोजगार, कारोबार, नौकरी-पेशा में उन्नति होती है। विश्वकर्मा पूजा में पंचदेव, श्रीहरि विष्णु, कलश गणेश, नवग्रह, भगवती, महादेव की भी पूजा होगी।

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  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – आश्विन
  4. अमांत – भाद्रपद

तिथि

  1. कृष्ण पक्ष एकादशी   – Sep 17 12:22 AM – Sep 17 11:39 PM
  2. कृष्ण पक्ष द्वादशी   – Sep 17 11:39 PM – Sep 18 11:24 PM

नक्षत्र

  1. पुनर्वसु – Sep 16 06:46 AM – Sep 17 06:26 AM
  2. पुष्य – Sep 17 06:26 AM – Sep 18 06:32 AM

आज का भगवद् चिन्तन
मित्र और शत्रु की पहचान

गलत मार्ग से रोकना और उचित मार्ग की तरफ बढ़ाना ही मित्रता का श्रेष्ठ एवं स्वाभाविक गुण भी है। विरोध करने वाला शत्रु नहीं अपितु गलत कार्यों का विरोध न करने वाला परम शत्रु होता है। दुर्योधन ने चाचा विदुर की बात मान ली होती तो महाभारत नहीं होता और रावण ने भाई विभीषण की बात मानी होती तो लंका विध्वंश नहीं होता। वास्तव में सच्चा मित्र वही है जो हमारी मति सुधार दे, जीवन को श्रेष्ठ गति देते हुए गोविन्द के चरणों में रति प्रदान कर दे।

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लोग सोचते हैं कि स्वजन-प्रियजन वही है, जो प्रत्येक स्थिति में आपका साथ दें लेकिन वास्तव में सच्चे प्रियजन वही हैं जो सदैव अनुचित मार्ग से आपको बचाने का प्रयास करें। वह व्यक्ति किंचित आपका शत्रु नहीं हो सकता जो आपको आपकी गलतियों का बार-बार स्मरण कराये अपितु वह आपका शत्रु अवश्य है जो आपके गलत दिशा में बढ़ते हुए कदमों को देखकर भी रोकने का प्रयास न करे। सौभाग्यशाली हैं वो लोग जिनके जीवन में उचित-अनुचित की परख करवाने वाले मित्र होते हैं।