आज का पंचांग : लोभ पाप का मूल

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

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आज कार्तिक शुक्ल पक्ष तृतीया, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, कार्तिक |

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आज तृतीया तिथि 01:19 AM तक उपरांत चतुर्थी | नक्षत्र अनुराधा | सौभाग्य योग 05:54 AM तक, उसके बाद शोभन योग | करण तैतिल 12:03 PM तक, बाद गर 01:20 AM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 10:46 AM – 12:11 PM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा |

आज का विचार

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यदि आप किसी को यह इत्मीनान दिलाना चाहते हैं कि वह गलती पर है तो उसे वास्तव में करके दिखाओ। आदमी देखी हुई वस्तुओं पर विश्वास करते हैं, उन्हें देखने दो.

आज का भगवद् चिन्तन
लोभ पाप का मूल

अधिक लोभ करना अधिक पाप वृत्तियों को जन्म देने जैसा ही है। लोभ के वशीभूत होकर ही मनुष्य द्वारा अनेक तरह के पाप एवं न करने जैसे कर्मों को किया जाता है। अधिक लोभ ही जीवन में पाप कर्मों का कारण भी बनता है। कामी मनुष्य के जीवन में निष्कामता आना सम्भव है, क्रोधी मनुष्य के जीवन में भी एक दिन परम शांति का प्रवेश संभव है, लेकिन लोभी मनुष्य के जीवन में प्रसन्नता की प्राप्ति अति कठिन है।

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जिस व्यक्ति की लोभ और मोह वृत्तियाँ असीम हैं, उस व्यक्ति को कहीं भी शांति नहीं मिल सकती। बहुत कुछ पाने की खुशी नहीं अपितु थोड़ा कुछ खोने का दुःख ही लोभ कहलाता है। अपनी उपलब्धियों पर प्रसन्न रहो और किसी के साथ अकारण अपनी तुलना करके अपने जीवन के सुख व प्रसन्नता को कम मत करो। दुनिया में बहुत लोगों के पास उतना भी नहीं, जितना आपके पास है। अधिक लोभ से बचो, यह आपको अनेक पापों से बचा लेगा।