आज का पंचांग : परिश्रम के समय प्रसन्न और विश्राम के समय आनंदित

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |

आज प्रतिपदा तिथि 02:47 PM तक उपरांत द्वितीया | नक्षत्र अनुराधा 01:55 PM तक उपरांत ज्येष्ठा | अतिगण्ड योग 10:43 AM तक, उसके बाद सुकर्मा योग | करण बव 02:47 PM तक, बाद बालव 04:00 AM तक, बाद कौलव | आज राहु काल का समय 10:31 AM – 12:12 PM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा |

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – मार्गशीर्ष
  4. अमांत – मार्गशीर्ष

तिथि

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  1. शुक्ल पक्ष प्रतिपदा   – Nov 20 12:17 PM – Nov 21 02:47 PM
  2. शुक्ल पक्ष द्वितीया   – Nov 21 02:47 PM – Nov 22 05:11 PM

नक्षत्र

  1. अनुराधा – Nov 20 10:58 AM – Nov 21 01:55 PM
  2. ज्येष्ठा – Nov 21 01:55 PM – Nov 22 04:46 PM

यूं तो हनुमान जी की स्तुति अलग-अलग ढंग से भक्तों ने की है, लेकिन तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में एक जगह बहुत सुंदर पंक्ति लिखी है। उत्तरकांड में वो लिखते हैं- ‘हनुमान सम नहिं बड़भागी। नहिं कोउ राम चरन अनुरागी ॥’ श्रीराम बैठे हुए थे, हनुमान जी उनको पंखा कर रहे थे। यह दृश्य देख शिव जी ने पार्वती से कहा, हनुमान के समान न तो कोई बड़भागी है और न कोई राम चरणों का प्रेमी है।

शिव जी ने अनूठी बात बोली- गिरिजा, जिनके प्रेम और सेवा की स्वयं प्रभु ने अपने मुख से बार-बार बड़ाई की है। क्या ऊंचाई रही होगी हनुमान जी की, जिनका यश श्रीराम ने स्वयं गाया। हमारे परिवारों में भी हर सदस्य बड़भागी हो सकता है। हम उसके भीतर छुपी योग्यता को पकड़ें।

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मंजिल पर तो सभी आनंद उठाते हैं, पर हनुमान जी यात्रा में भी आनंद लेते हैं। चलना परिश्रम है, पहुंचना विश्राम है। हनुमान जी का व्यक्तित्व परिश्रम के समय भी प्रसन्न रहता है और विश्राम में आनंदित रहता है।