पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष चतुर्थी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |आज है सोमवार व्रत और वरद चतुर्थी |
आज चतुर्थी तिथि 09:22 PM तक उपरांत पंचमी | नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 09:53 PM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा | शूल योग 12:36 PM तक, उसके बाद गण्ड योग | करण वणिज 08:26 AM तक, बाद विष्टि 09:22 PM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 08:11 AM – 09:32 AM है | आज 04:26 AM तक चन्द्रमा धनु उपरांत मकर राशि पर संचार करेगा |
आज का विचार
विचारों की खूबसूरती कही से भी मिले चुरा लो क्योंकि चेहरे की खूबसूरती तो उमर के साथ बदल जाती है मगर विचारों की खूबसूरती हमेशा दिलो मे अमर रहती है.
आज का भगवद् चिन्तन
सत्य युक्त जीवन
जीवन की प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। सत्य की राह पर हार भी मिले तब भी उसका त्याग नहीं करना चाहिए। एक बात सदैव स्मरण रखना कि सिद्धांतों पर चलकर हारना, झूठ के बल पर जीतने से कई गुना बेहतर है। सिद्धांत ही हमारे जीवन में हार-जीत से भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। सत्य का पथ, श्रेष्ठता का पथ और शास्त्रानुकूल पथ का अनुगमन ही जीवन के श्रेष्ठ सिद्धांत हैं।
हमारे महापुरुषों की महानता के पीछे बस एक ही कारण था कि उन्होंने जीतने के बजाय हारना स्वीकार किया पर अपने सिद्धांतों का परित्याग कभी भी नहीं किया। सत्य का पथ सुगम तो नहीं होता पर श्रेष्ठ जरूर होता है। सब प्रतिकूलताओं को सहने के बाद एक समय वो भी आयेगा जब हमारी निंदा करने वाली भीड़ ही हमारी सबसे बड़ी प्रशंसक बन जायेगी। हमारी प्राथमिकता प्रशंसा युक्त जीवन की नहीं अपितु सत्य युक्त जीवन की होनी चाहिए।