आज का पंचांग : जीवन का प्रसाद

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

कुसंग से बच्चों को बचाया जाए, ऐसी नसीहत माता-पिता को दी जाती है। लेकिन अगर माता-पिता ही कुसंग कर जाएं तो इसकी कीमत बच्चों को चुकानी पड़ती है। इतिहास में ऐसे बहुत किस्से हैं कि बच्चों के कारण माता-पिता दुःखी हो गए। इसका उल्टा भी होता है। एक घटना ऐसी भी है, जिसने इतिहास को अलग मोड़ दे दिया। कोपभवन में राजा दशरथ और रानी कैकयी के बीच हुआ वार्तालाप राम को 14 वर्ष के लिए वन भेज देता है।

कैकयी का शील मिटा, दशरथ का जीवन गया, अयोध्या को दुःख मिला, लेकिन राम इस सबमें अपनी गरिमा और बढ़ा गए। अब तो माता-पिता को और सावधान होना होगा। इस समय बच्चे जिस ढंग से पाले जा रहे हैं, माता-पिता उनको सब दे रहे हैं। लेकिन वसीयत में नसीहत भी दी जाए। आने वाले वर्षों में भारत का पारिवारिक ढांचा 35% घटकर संकुचित हो जाएगा।

हम बीस से दस, दस से पांच, पांच से चार और अब दो पर आकर रुक गए हैं। कम सदस्यों के परिवार में जितना सुख है, उससे ज्यादा दुःख है- जो अब दिखेगा।

फाल्गुन कृष्ण पक्ष नवमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, माघ

आज नवमी तिथि 09:59 AM तक उपरांत दशमी | नक्षत्र अनुराधा 10:52 AM तक उपरांत ज्येष्ठा | व्याघात योग 02:29 AM तक, उसके बाद हर्षण योग | करण गर 09:59 AM तक, बाद वणिज 11:12 PM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 12:41 PM – 02:04 PM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा |

आज का विचार

मानव जीवन में ना तो समस्याएं कभी खत्म हो सकती हैं और ना ही संघर्ष। समस्या में ही समाधान छिपा होता है। समस्या से भागना उसका सामना ना करना यह सबसे बड़ी समस्या है.!!

आज का भगवद् चिंतन
जीवन का प्रसाद

जीवन का एक सत्य यह भी है, कि संग्रह किया गया विषाद बन जाता है और बाँटा गया प्रसाद बन जाता है। उपयोग, उपभोग और नाश शास्त्रों में धन की ये तीन गतियां बताई गई हैं। धन से जितना आप चाहो सुख के साधनों को अर्जित करो बाकी बचा धन सृजन कार्यों में, सद्कार्यों में, श्रेष्ठ कार्यों में लगे अपने जीवन का ऐसा अभ्यास बनाओ। यदि आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो समझ लेना फिर आपका धन नाश को प्राप्त होने वाला है।

जो लोग धन का दुरूपयोग अथवा अनुपयोग करते हैं समझो वो उसका नाश ही कर रहे हैं। दुनिया आपको इसलिए याद नहीं करती कि आपके पास बड़ा धन है अपितु इसलिए याद करती है कि आपके पास बड़ा मन है और आप केवल धन का अर्जन ही नहीं करते अपितु आवश्यकता पड़ने पर विसर्जन भी करते हैं। केवल धन के अर्जन से समाज में आपका महत्व नहीं बढ़ जाता अपितु अर्जन के साथ-साथ विसर्जन ही समाज में किसी व्यक्ति को मूल्यवान एवं विशिष्ट बनाता है।

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