आज का पंचांग : स्वयं को ही बदलें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

फाल्गुन कृष्ण पक्ष दशमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, माघ |

आज दशमी तिथि 12:22 PM तक उपरांत एकादशी | नक्षत्र ज्येष्ठा 01:42 PM तक उपरांत मूल | हर्षण योग 03:05 AM तक, उसके बाद वज्र योग | करण विष्टि 12:22 PM तक, बाद बव 01:27 AM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 02:04 PM – 03:28 PM है | आज 01:42 PM तक चन्द्रमा वृश्चिक उपरांत धनु राशि पर संचार करेगा |

प्रभात चिंतन

सदयं हृदयं यस्य
भाषितं सत्यभूषितम् ।
कायः परहिते यस्य
कलिस्तस्य करोति किम्।।

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भावार्थ:- जिसका हृदय करुणामय है, वाणी सत्य से सजी है, और शरीर परोपकार में लगा है उसका कलियुग भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

आज का भगवद् चिंतन
स्वयं को ही बदलें

महापुरुषों के वचन हैं, कि मनुष्य को सदैव स्वयं के प्रति कठोर और दूसरों के प्रति सरल होना चाहिए। यहाँ प्रत्येक व्यक्ति दूसरे को सुधारने में लगा है। आज प्रत्येक व्यक्ति की मनःस्थिति कुछ इस प्रकार की हो गई है कि वह स्वयं चाहे कितना ही झूठ बोले पर कोई दूसरा बोल दे तो उसे बर्दाश्त नहीं हो पाता है। वो दूसरों पर कितना भी क्रोध कर ले पर जब कोई उस पर क्रोध करता है, तब उसे असहनीय हो जाता है।

ज्ञानी व्यक्ति किसी पूर्वाग्रह से मुक्त होता है। वह किसी पर अपना आधिपत्य जमाने का प्रयास नहीं करता है। लोग जैसे हैं, उन्हें वैसे ही स्वीकार कर लेना ही सबसे बड़ा ज्ञान है। भगवान बुद्ध कहते हैं, कि सत्य का पालन स्वयं करना तो धर्म है पर दूसरों से जबरदस्ती सत्य का पालन कराना भी हिंसा का एक रूप है। प्रयासरत रहें कि जो परिवर्तन हम दूसरों में देखना चाहते हैं, उन्हें पहले स्वयं के जीवन में लाया जाये।

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