पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
मनुष्य के जीवन में अचानक जब कुछ होता है, तब उसकी परीक्षा होती है कि वो कितना समझदार है। कैसे उसका सामना करता है। आप कितने ही समर्थ व्यक्ति हों, लेकिन विपरीत परिस्थिति आपके हाथ में नहीं है। हां, उसको संभालना आपके हाथ में है।
विपत्ति में कुछ लोग निखर कर कुंदन बन जाते हैं और कुछ कोयला रह जाते हैं। रामकथा में एक बहुत अच्छा उदाहरण है। राम को राजा बनना था लेकिन कैकेयी ने निर्णय पलट दिया और राम को बुलवाया। कैकेयी के महल में राम ने देखा कि दशरथ विचलित से लेटे हुए हैं।
कैकेयी आवेश में है। ऐसा दृश्य राम ने पहली बार देखा। उनके लिए पंक्ति लिखी है- प्रथम दीख दुख सुना न काउ। पहली बार कोई दुःख देखा। इससे पहले कभी दुःख सुना भी न था। लेकिन राम मन ही मन मुस्कराए और कहा- जो होता है, अच्छा ही होता है।
और साबित भी कर दिया कि वनवासी राम इतने लोकप्रिय हुए कि जिन्होंने अयोध्या छोड़ी, वो लोगों के दिलों में पहुंच गए। तो जीवन में जब कुछ अचानक आए, विपरीत आए, श्रीराम को याद करके अच्छे-से उसका सामना करिएगा।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:28 ए एम | सूर्यास्त | 06:47 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 01:20 पी एम | चन्द्रास्त | 03:25 ए एम, मार्च 28 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | नवमी – 10:06 ए एम तक | नक्षत्र | पुनर्वसु – 03:24 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| दशमी | पुष्य | ||
| योग | अतिगण्ड – 10:10 पी एम तक | करण | कौलव – 10:06 ए एम तक |
| सुकर्मा | तैतिल – 09:23 पी एम तक | ||
| वार | शुक्रवार | गर | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 13 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मिथुन – 09:36 ए एम तक | नक्षत्र पद | पुनर्वसु – 09:36 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| कर्क | पुनर्वसु – 03:24 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मीन | पुष्य – 09:13 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद | पुष्य – 03:04 ए एम, मार्च 28 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | उत्तर भाद्रपद | पुष्य |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 18 मिनट्स 26 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 40 मिनट्स 25 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:38 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:55 ए एम से 05:42 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:18 ए एम से 06:28 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:13 पी एम से 01:02 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:30 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:46 पी एम से 07:09 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:47 पी एम से 07:57 पी एम |
| अमृत काल | 01:05 पी एम से 02:38 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:14 ए एम, मार्च 28 से 01:00 ए एम, मार्च 28 |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 06:28 ए एम से 03:24 पी एम | रवि योग | पूरे दिन |
आज का विचार
व्यक्ति के व्यक्तित्व को दो शब्द परिभाषित करते है, धैर्य और दूसरा आपका व्यवहार। जिसकी प्रेरणा से आपका चरित्र बदल जाय, वही आपका श्रेष्ठ गुरु है.!