पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
जीवन में हमारी ऊर्जा को जो बातें पी जाती हैं, उनमें से एक है संदेह। यदि आप अत्यधिक संदेहग्रस्त होते जा रहे हैं तो ये मनोरोग है। लेकिन मनुष्य का स्वभाव है संदेह करना। तो इसे दूर करने के हमारे यहां जो उपाय बताए गए, उनमें से एक है ईश्वर के चरित्र का श्रवण किया जाए।
गरूड़ जी को काकभुशुंडि जी कथा सुना रहे हैं। सुनकर क्या परिणाम आया, इस पर गरुड़ जी कहते हैं- गयउ मोर संदेह सुनेउँ सकल रघुपति चरित, भयउ राम पद नेह तव प्रसाद बायस तिलक। रघुनाथ जी के सद्धरित्र मैंने सुने, जिससे मेरा संदेह जाता रहा।
हे काक शिरोमणि, आपके अनुग्रह से श्रीराम जी के चरणों में मेरा प्रेम हो गया। लिखा है, संदेह जाता रहा और आपके अनुग्रह से। यह ‘अनुग्रह’ शब्द हमें आश्वस्त करता है कि जब हम किसी के प्रति अनुग्रही हो जाएं, धन्यवाद से भर जाएं, सद्भाव से भरपूर हों तो संदेह से भी मुक्त होंगे। यह युग ऐसा है कि इसमें सावधानी तो रखी जाए पर संदेह न किया जाए। और अगर अपनों पर संदेह होने लगे तो जीवन नरक हो जाता है।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:27 ए एम | सूर्यास्त | 06:47 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 02:25 पी एम | चन्द्रास्त | 04:05 ए एम, मार्च 29 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | दशमी – 08:45 ए एम तक | नक्षत्र | पुष्य – 02:50 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| एकादशी | अश्लेशा | ||
| योग | सुकर्मा – 08:06 पी एम तक | करण | गर – 08:45 ए एम तक |
| धृति | वणिज – 08:13 पी एम तक | ||
| वार | शनिवार | विष्टि | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 14 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कर्क | नक्षत्र पद | पुष्य – 08:56 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मीन | पुष्य – 02:50 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद | अश्लेशा – 08:45 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | उत्तर भाद्रपद – 11:18 ए एम तक | अश्लेशा – 02:41 ए एम, मार्च 29 तक | |
| उत्तर भाद्रपद | अश्लेशा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 20 मिनट्स 05 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 38 मिनट्स 46 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:37 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:54 ए एम से 05:41 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:17 ए एम से 06:27 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:13 पी एम से 01:02 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:30 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:46 पी एम से 07:10 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:47 पी एम से 07:57 पी एम |
| अमृत काल | 08:35 ए एम से 10:09 ए एम | निशिता मुहूर्त | 12:14 ए एम, मार्च 29 से 01:00 ए एम, मार्च 29 |
| रवि योग | 06:27 ए एम से 02:50 पी एम |