आज का पंचांग : सुसंग में रहें, सत्संग में रहें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

पञ्चाङ्ग
तिथिप्रतिपदा – 08:42 ए एम तकनक्षत्रचित्रा – 07:25 पी एम तक
द्वितीयास्वाती
योगव्याघात – 02:09 पी एम तककरणकौलव – 08:42 ए एम तक
हर्षणतैतिल – 09:22 पी एम तक
वारशुक्रवारगर
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते20चैत्र – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिकन्या – 06:28 ए एम तकनक्षत्र पदचित्रा – 06:28 ए एम तक
तुलाचित्रा – 12:56 पी एम तक
सूर्य राशिमीनचित्रा – 07:25 पी एम तक
सूर्य नक्षत्ररेवतीस्वाती – 01:55 ए एम, अप्रैल 04 तक
सूर्य नक्षत्र पदरेवती – 05:24 ए एम, अप्रैल 04 तकस्वाती
रेवती  
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 29 मिनट्स 56 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 28 मिनट्स 57 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:36 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:49 ए एम से 05:35 ए एमप्रातः सन्ध्या05:12 ए एम से 06:21 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:11 पी एम से 01:01 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:31 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:49 पी एम से 07:12 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:51 पी एम से 07:59 पी एम
अमृत काल12:32 पी एम से 02:15 पी एमनिशिता मुहूर्त12:12 ए एम, अप्रैल 04 से 12:58 ए एम, अप्रैल 04

आज का भगवद् चिन्तन
सुसंग में रहें, सत्संग में रहें

यदि आज कुसंग रूपी विष का सेवन करते रहे एवं समय रहते इससे बचने का प्रयास न किया गया तो यह धीरे-धीरे हमारे जीवन को नष्ट करने वाला ही है। कुसंग के प्रभाव से हमारा भजन उसी तरह नष्ट हो जाता है, जिस तरह पाले के प्रभाव से हरी-भरी बेल सूखकर धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है। हम कितना भी भजन कर लें, सत्संग कर लें लेकिन निरंतर कुसंग का सेवन करते रहें तो सुना हुआ, पढ़ा हुआ, और जाना हुआ कोई भी सुविचार आचरण में नहीं उतर पायेगा।

जीवन के उत्थान के लिए यदि सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण कोई बात है तो वो है, हमारा संग।धनवान के संग से धनोपार्जन के विभिन्न साधनों का ज्ञान हो जाता है, जो धनवान बना सकता है। ऐसे ही ज्ञानवान बनने के लिए ज्ञानी जनों का और धर्मवान बनने के लिए धर्मनिष्ठ महापुरुषों का संग आवश्यक हो जाता है। संग के प्रभाव से तो तोता भी राम-राम रटने लग जाता है। सुसंग से सत्संग में प्रीति बढ़ती है और सत्संग से जीवन सुवासित हो जाता है

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